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YouTube चैनल से खेती-किसानी की समझ को बेहतर कर रहे अन्नदाता
August 27, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली, सूचना तकनीक के दौर में किसान भी समय के साथ कदमताल करते हुए खेतीबाड़ी से जुड़ी जानकारी जुटाने में इंटरनेट का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा ने भी समय की मांग को समझा और 15 अगस्त से यूट्यूब चैनल पर किसान समाचार की शुरुआत कर दी। इसके माध्यम से किसानों को न सिर्फ संस्थान में चल रही तमाम महत्वपूर्ण शोध गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलेगी, बल्कि खेत में लगी फसल की देखभाल कैसे करें, इसके बारे में भी पता चलेगा। संस्थान की इस पहल का किसान स्वागत कर रहे हैं। संस्थान के विज्ञानियों का कहना है कि किसान खासकर युवा किसान अब कृषि में नई तकनीक का इस्तेमाल बड़े उत्साह के साथ करते हैं। ऐसे किसान अब विज्ञानियों से अधिकाधिक संवाद चाहते हैं ताकि उन्हें नई तकनीक या नई जानकारियों के बारे में जल्द से जल्द पता चले और वे इन जानकारियों का इस्तेमाल करें। संस्थान के कई विज्ञानियों ने इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किसानों को साथ लेकर वाट्सएप ग्रुप बनाए हैं, लेकिन इसमें सदस्यता को लेकर एक सीमा निर्धारित है। ऐसे में संस्थान की ओर से यूट्यूब चैनल पर समाचार की शुरूआत कर किसानों तक अधिक से अधिक पहुंच बनाने की कोशिश शुरू की गई है। चैनल के माध्यम से संस्थान किसानों को उन तमाम तकनीकों के बारे में बताया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल कर खेतीबाड़ी को बेहतर किया जा सके। इसके अलावा खेतीबाड़ी से जुड़े समसामयिक जरूरतों के बारे में भी किसानों को बताया जा रहा है। आने वाले समय में किसान को गेहूं, सरसों या अन्य फसल को लेकर किस किस तरह की तैयारी करनी चाहिए, इसके बारे में किसानों को तत्काल बताने के बजाय कुछ महीने पहले ही बताया जाएगा, ताकि वे भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

2360 लोग कर चुके हैं सब्सक्राइब

धीरे-धीरे यह चैनल किसानों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। अभी तक इस चैनल को 2360 लोग सब्सक्राइब कर चुके हैं। किसानों के साथ विज्ञानियों की होने वाली बातचीत में इस चैनल के बारे में विस्तार से बताया जाता है, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा किसान इससे जुड़ें और लाभ उठाएं। साथ ही किसानों से जुड़े वाट्सएप ग्रुप पर भी समाचार के वीडियो दिए जाते हैं।

चैनल पर कायम रहेगा दोतरफा संवाद

यूट्यूब चैनल शुरू होने के बाद किसानों की ओर से प्रतिक्रियाएं मिल रही है। अभी यह समाचार सिर्फ हिंदी में है। ऐसे में कई लोगों ने इसे प्रादेशिक भाषा में भी जारी करने की मांग की है, जिससे कि देश के सभी किसान इसका लाभ उठा सकें। साथ ही ये चैनल शुरू करने पर संस्थान को मुबारकबाद भी दी जा रही है। विज्ञानियों का कहना है कि यूट्यूब चैनल पर किसान अपनी राय रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर विज्ञानी उनकी समस्या का समाधान अगले प्रसारण में करेंगे, जिससे की दोतरफा संवाद जारी रहे।