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यूपी में लालफीताशाही पर बड़ा अंकुश, अब सिर्फ 72 घंटे में मिलेगी छोटे व मझोले उद्योग लगाने की मंजूरी   
August 19, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


प्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, छोटे एवं मझोले उद्योगों की स्थापना में लालफीताशाही दूर करने की ओर बड़ा कदम उठाते हुए यूपी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (अवस्थापना एवं संचालन) अधियिम-2020 (एमएसएमई एक्ट) लागू करने के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। वर्तमान में उद्यमी को 29 विभागों से करीब 80 तरह की अनापित्तयां लेनी होती है। एमएसएमई एक्ट लागू होने से उद्यमी केवल एक अनापत्ति प्राप्त कर 1,000 दिन तक उद्यम संचालित कर सकेगा। बाकी अनापत्तियां उसे 900 दिनों में प्राप्त करनी होगी। इस दौरान इकाई की किसी तरह की जांच-पड़ताल व पूछताछ नहीं होगी। इससे लघु उद्योगों के माध्यम से एक वर्ष में 15 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
एमएसएमई एक्ट के अंतर्गत उद्यमी को जिला अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय नोडल एजेंसी के समक्ष तय प्रारूप पर अपना आवेदन व घोषणा पत्र जमा करना होगा। यह प्रपत्र एक्ट में शामिल है। इसके अंतर्गत भूमि संबंधी, विद्युत सुरक्षा संबंधी, पर्यावरण संबंधी, श्रम संबंधी व अग्निशमन संबंधी अनापत्ति के लिए घोषणा पत्र देना होगा। घोषणा पत्र पाने के 72 घंटे के भीतर उपायुक्त उद्योग स्वीकृति प्रमाण पत्र जारी कर देगा। इस प्रमाण पत्र को निवेश मित्र पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा। 72 घंटे में स्वीकृति जारी करने की समयसीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकेगा।
विकास प्राधिकरण केस्तर पर उनकी महायोजना के हिसाब से प्राधिकरणों द्वारा तय प्रारूप व समय सीमा में उद्यमी के आवेदन को मंजूरी दी जाएगी। नोएडा प्राधिकरण द्वारा 1000 वर्ग मीटर से छोटे प्लाट के लिए 48 घंटे के अंदर ही अनुमति दिए जाने की व्यवस्था है। भूमि के संबंध में राजस्व अधिनियमों के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भू-उपयोग परिवर्तन व सीलिंग संबंधी स्वीकृतियां आवेदन पत्र प्राप्त होने पर 72 घंटे के भीतर जारी होंगी।
 *नोडल एजेंसी में ये अधिकारी होंगे शामिल* 
प्रदेश स्तर पर आयुक्त एवं निदेशक उद्योग की अध्यक्षता में उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय नोडल एजेंसी होगी। इसमें संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अधीक्षण अभियंता क्षेत्रीय विद्युत निगम, सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा, क्षेत्रीय प्रबंधक यूपीएसआईडीसी, उपश्रमायुक्त/सहायक श्रमायुक्त, जिला अग्निशमन अधिकारी व उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र शामिल होंगे। उपायुक्त उद्योग एजेंसी के सदस्य सचिव होंगे।
 *एमएसएमई के भुगतान के लिए मंडल स्तरीय काउंसिल* 
वर्तमान में एमएसएमई इकाइयों को अपना भुगतान प्राप्त करने के लिए कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में केवल एक फैसिलिटेशन काउंसिल होने से बड़ी संख्या में एमएसएमई के मामले लंबित चल रहे हैं। नए एक्ट में मंडल स्तर पर फैसिलिटेशन काउंसिल बनाने की व्यवस्था की गई है। इससे मंडल स्तर पर ही एमएसएमई इकाइयों के भुगतान संबंधी समस्याओं का निराकरण हो जाएगा। यह काउंसिल मंडलायुक्तों की अध्यक्षता में होगी। यदि मंडलीय फैसिलिटेशन काउंसिल के निर्णय का अनुपालन नहीं होता है तो देयकों की वसूली के लिए वसूली प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा। भू राजस्व की तरह वसूली हो सकेगी। इससे एमएसएमई को भुगतान पाने में आसानी होगी।
 *एक्ट से ये उद्यम बाहर* 
- तंबाकू उत्पाद, गुटखा, पान मसाला आदि।
- अल्कोहल, वातयुक्त पेय पदार्थ, कार्बोनेटेड उत्पाद।
- पटाखों के विनिर्माण से संबंधित उद्यम।
- 40 माइक्रान से कम अथवा सरकार द्वारा तय मोटाई से कम प्लास्टिक कैरी बैग।
- सरकार द्वारा समय-समय प्रतिबंधित सूची में शामिल उत्पाद।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा चिह्नित लाल श्रेणी की इकाइयां।
- हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों से तय समयसीमा में अनुमति लेकर नारंगी व हरित श्रेणी की इकाइयां स्थापित की जा सकेंगी।