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विषम परिस्थितियों में आनलाइन शिक्षण एक चुनौती भरा कार्य---गीता यादव
September 3, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

गिरिराज शुक्ला
फतेहपुर
 प्राथमिक शिक्षा जगत को लेकर जो हमेशा नकारात्मक सोच रहती थी उस सोच.को सकारात्मक बनाने की दिशा में प्राथमिक विद्यालय मुरारपुर.में कार्यरत शिक्षिका गीता यादव ने.जो.कर दिखाया है काश!अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं सबक लेकर शिक्षण कार्य में रुचि दिखाएं तो दसको से.चली आ रही प्राथमिक विद्यालयों के प्रति लोगो की.नकारात्मक सोच को सदा सदा के लिए खत्म किया.जा सकता है।
शिक्षक दिवस के मौके.पर  हमारे संवाददाता   गिरिराज शुक्ला ने कोरोना काल में उत्पन्न शिक्षण व्यवधान के.वावजूद आनलाइन शिक्षण को कैसे संचालित किया जब कि ग्रामीण क्षेत्र में हर.छात्र या अभिभावक के पास एंड्रॉयड सेल फोन नही हैं पर प्राइमरी शिक्षा में एक नया अध्याय जोडने.वाली शिक्षिका गीता यादव से एक खा़स बातचीत जिसमें वह जानकारी दे रही है कि आनलाइन शिक्षा किस तरह से छात्र-छात्राओंके देने में सफलता मिली ।पेश है शिक्षिका गीता यादव के शब्दों में
यूं तो मेरे विद्यालय का ऑनलाइन व्हाट्सएप ग्रुप लॉकडॉउन के पहले ही बना था जिसमें 10-15 अभिवावक थे । ग्रामीण परिवेश में सबसे बड़ी समस्या ये आती है कि हर किसी के पास एंड्रॉयड फोन नहीं होते । ये मेरे शिक्षण के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी । सर्वप्रथम मैंने समस्त अभिवावकों की एक सूची बनाई जिसमें मैंने उन्हें तीन कैटेगरी में विभक्त किया 1- ऐसे अभिवावक जिनके पास एंड्रॉयड फोन हैं ।
 2- ऐसे अभिवावक जिनके पास साधारण की पैड वाले फोन हैं ।
 3- ऐसे अभिवावक जिनके पास किसी भी प्रकार का फोन उपलब्ध नहीं हैं।

चरण -2

ऑनलाइन शिक्षण में एंड्रॉयड फोन वाले अभिवावकों की मैं अपने तैयार शिक्षण वीडियो,  टीएलएम , काव्यांजलि, स्वरान्जलि , पीडीएफ आदि प्रतिदिन साझा करती थी और बच्चे भी अपने द्वारा किया गया कार्य  मुझे भेजते थे। 
          ऐसे अभिवावक जिनके पास साधारण फोन था उन्हें मैं कॉल करके एसएमएस द्वारा कार्य भेजती थी पर अब मुख्य समस्या उन बच्चों के साथ थी जिनके पास किसी भी प्रकार का फोन नहीं था यकीन मनिए इस तरह के बच्चो की संख्या का प्रतिशत ही ज्यादा था और यही बच्चे पढ़ाई से वंचित रहे जा रहे थे। ये मेरे और मेरी ऑनलाइन शिक्षा के लिए गहन चिन्ता  का विषय था ।

चरण -3

लॉकडाउन में गांव से बाहर पढ़ाई करने गए कई नवयुवक युवतियां वापस गांव में आए और विद्यालय में कोरेंटाइन रहने के समय मुझसे संपर्क में आए । मिलने पर सबने विद्यालय की प्रशंसा की तो मैंने अपनी समस्या भी उनके सामने रखी और साथ देने के लिए मोटिवेट किया , अपनी मिट्टी के लिए कुछ कर दिखाने का जोश जगाया और बना दिया *शिक्षा सारथी*। मोहल्ले के बच्चों के अनुसार शिक्षा सारथी को ऐसे छात्र चिन्हित करा दिए जिन तक मेरा ऑनलाइन कार्य पहुंचाया जाना था और जब बच्चे वो कार्य कर  लें तो उसको फोटो भी ये शिक्षा सारथी मुझ तक पहुंचा देते थे।

चरण - 4

इन सभी शिक्षा सारथियों के पास एंड्रॉयड फोन था जिसका प्रयोग वे उन छात्रों के साथ कर  रहे थे जिन के पास किसी प्रकार का फोन  उपलब्ध नहीं था । अब वे बच्चे भी अपना कार्य मुझसे साझा कर पा रहे थे । इस नवाचार से लाभ ये हुआ कि वे बच्चे जो नियमित विद्यालय नहीं आ पा रहे थे वो भी शिक्षा से जुड़ रहे थे । मेरे शिक्षा सारथियों का उत्साह भी बढ़ गया । अब हम केवल उन बच्चों को ही लाभान्वित नहीं कर रहे जो मेरे विद्यालय में नामांकित हैं बल्कि  ये शिक्षा सारथी उन सभी छात्रों को इस नवाचार द्वारा प्रभावित कर रहे हैं , जो किसी भी विद्यालय में नामांकित हैँ , उससे विद्यालय का ऑनलाइन नामांकन भी बढ़ा है । प्राइवेट से बच्चे सरकारी में नामांकन करा रहें हैं ।