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विकास के सपने दिखा जनता की भावनाओं से खेलना नेताओं की आदत में हुआ शुमार 
August 27, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

चुनाव दर चुनाव विकास का सपना दिखा समाजसेवी बन पहुंचते नेता जनता की शरण में

सत्ता मिलते ही लोगों व उनकी समस्याओं से मुंह मोड़ लेते हैं नेता

सरकारें व बदलते रहे जनता के नुमाइंदे पर लोगों की नहीं बदली बदहाली की तकदीर

जिले में ना दिख रहा विकास ना रोजगार के अवसर

देश को प्रधानमंत्री देने वाले जिले की नहीं बन सकी पहचान

फतेहपुर।लोगों को सपने दिखाकर उनकी भावनाओं से खेलना नेताओं की आदत में शुमार हो गया है।चुनावों के समय विकास के सपने दिखाने वाले नेता समाजसेवी बनकर जनता के बीच जाते हैं और सत्ता मिलते ही जनता के मालिक बन बैठते हैं। अपने किए गए वादों को याद दिलाने के बावजूद उन पर अमल करने की जहमत तक उनके द्वारा नहीं उठाई जाती। इसी का नतीजा है कि चाहे औगासी का पुल रहा हो, स्पोर्ट्स कालेज का निर्माण रहा हो या फिर हवाई अड्डे के लिए छोड़ी गई जमीन पर अवैध कब्जों का मामला रहा हो। ना तो सरकारें गंभीर हुईं और ना ही उन सरकारों में प्रतिनिधि के तौर पर रहे जनता के नुमाइंदे नेता। जनप्रतिनिधियों की बेरुखी व वादा खिलाफी का ही नतीजा है कि फतेहपुर जिला विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ सका है।
फतेहपुर ने देश को प्रधानमंत्री तक दिया लेकिन अभी भी जनपद अपनी पहचान नहीं बना सका है।
विकास की बात कौन करे? यहां लोग अपनी मूलभूत समस्याओं के निराकरण तक के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। 
बहुजन समाज पार्टी की सरकार में शुरू हुए काम सरकार जाने तक पूरे नहीं हुए और बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार में भी इन अधूरे कामों की सुधि नहीं ली गई ।3 साल से अधिक की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही है जिसके चलते यमुना नदी पर औगासी का पुल अधूरा ही पड़ा है और आज भी लोग यमुना नदी को नाव के सहारे ही पार करने की जहमत जान हथेली पर रखकर उठाते हैं।
 बसपा शासनकाल से स्पोर्ट्स कालेज का शुरू निर्माण कार्य अभी आधा भी पूरा नहीं हो सका है। हवाई अड्डे की जमीन पर भू माफियाओं ने अतिक्रमण कर लिया।
 कभी हवाई अड्डे का सपना देखने वाले जिले के लोगों को अब यह याद भी नहीं है कि इसके लिए जमीन कहां छोड़ी गई थी? वहीं केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के नुमाइंदों ने ऐतिहासिक, पौराणिक धरोहरों को समेट कर विकास की राह पर जिले को प्रदेश व देश के नक्शे में लाने का वादा तो किया लेकिन उसे पूरा करने के प्रयास तक नहीं किए गए जिसका नतीजा है की वादे अभी अधूरे ही हैं।

केंद्रीय विद्यालय का ढिंढोरा 5 साल से पीटा जा रहा है लेकिन विद्यालय निर्माण की अभी तक नींव नहीं रखी जा सकी है। 
बमुश्किल से मौजूदा सत्र में राजकीय इंटर कॉलेज की नई बिल्डिंग पर अतिक्रमण कर कक्षा 5 तक के क्लासेज चलाने की कार्यवाही शुरू की गई है। जिस तरह से आरक्षण का खेल खेला जाना है उससे आम जनता का केंद्रीय विद्यालय से भला होने वाला नहीं है। बंद कताई मिल की जमीन पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कच्छप गति से शुरू है। ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां ठप हो गई हैं जो बची हैं वह भी बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन इन्हें बचाने की कोशिश नहीं की जा रही है जिससे स्थानीय लोगों को रोजी रोजगार का संकट खड़ा है।
सांसद व सभी छह विधायक भारतीय जनता पार्टी व उसके समर्थित दल से होने के बावजूद फिलहाल जिले के लोगों की किस्मत में बदहाली ही नजर आ रही है। 
केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का बखान कर नेता अपनी राजनीति चमका रहे हैं। योजनाएं भी ऐसीं जो कागजों में तो सरपट दौड़ रही हैं लेकिन उनकी जमीनी हकीकत किसी से छिपी नहीं है।
 कोरोना का बहाना लिए जन समस्याओं से मुंह मोड़े जनप्रतिनिधि बिगड़ी कानून व्यवस्था, लोगों की बदहाली व भ्रष्टाचार के मामलों में मौन धारण किए हैं! जब यह हालात हों तो आखिर किन राजनीतिक दलों व नेताओं से आमजन उम्मीद लगा कर बैठे।