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विकास दुबे एनकाउंटर पर उठ रहे सवाल, फिल्मी स्टाइल से किया गया एनकाउंटर
July 11, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • राजनीति


बिंदकी/फतेहपुर  

कांग्रेस नेता विवेक मिश्रा ने कुख्यात अपराधी विकास दुबे के फिल्मी स्टाइल से किए गए एनकाउंटर पर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जिस प्रकार पुलिस ने दुबे एनकाउंटर को बता रही है वह किसी फिल्म की इससे कम नहीं यह बात जनता को हजम नहीं हो रही
       ज्ञात हो कि 2 और 3 तारीख की रात को कानपुर जनपद के बिकरु गांव में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम पर हमला करके एक डीएसपी समेत 8 पुलिस जवानों को शहीद कर दिया था और मौके से फरार हो गया था जिसके साथियों को पुलिस ने ढूंढ ढूंढ कर एनकाउंटर कर दिया था लेकिन पूरे गेम का मास्टरमाइंड विकास दुबे फरार चल रहा था जिसने मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकालेश्वर में मंदिर में अपनी पहचान बता कर अपने आप को गिरफ्तार करवा दिया था जिसकी पुष्टि मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने किया था इसके बाद उज्जैन की सीजेएम कोर्ट में उसे हाजिर किया गया इसके बाद कोर्ट के माध्यम से उत्तर प्रदेश की पुलिस को सौंपते हुए बाकायदा बुलेट प्रूफ जैकेट पहना कर वीडियो ग्राफी की गई थी जिस वाहन से विकास दुबे को कानपुर लाया जा रहा था उसी के पीछे मीडिया कर्मियों की गाड़ी भी लगी हुई थी लेकिन सुबह लगभग 6:30 के आस-पास झांसी टोल प्लाजा के समीप सभी गाड़ियों को रोक दिया गया और विकास दुबे की गाड़ी को आगे बढ़ाते हुए एक पुलिस गाड़ी भी उसके पीछे चलती गई कानपुर पहुंचने से 17 से 18 किलोमीटर पहले गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट जाती है और इसके बाद विकास दुबे पुलिस कर्मियों की बंदूक लेकर भागने लगता है और पुलिस उस पर गोलियां चलाती है हैरान करने वाली बात यह है कि यदि वह उनकी बंदूक लेकर भाग रहा था तो उसके सीने में गोली कैसे लगी और गाड़ी कैसे पलट गई इसके साथ-साथ टोल प्लाजा पर सारी गाड़ियों को क्यों रोक दिया गया इन्हीं सब कारणों की वजह से पुलिस के इस फिल्मी  एनकाउंटर पर पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े होना लाजमी है मेरी यह सरकार से मांग है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच हो जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिरकार विकास दुबे से सबसे ज्यादा खतरा किसको था।