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वजहें कुछ भी रही हों लेकिन मौरंग माफियाओं के हाथों ही खेले हैं सत्ताधारी
August 7, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

नेताओं की चुप्पी व संरक्षण से जिला प्रशासन रहा है बैकफुट पर!

यहां अवैध खनन,ओवरडंपिंग, मिट्टी व गंगा बालू के खनन, ओवर लोडिंग पर नहीं लग सकी रोक!
अवैध डंपिंग पर अधिकारियों की कार्रवाई से बड़े माफिया दूर!

लूट-घसोट,भ्रष्टाचार,पुलिसिया उत्पीड़न पर नेताओं की चुप्पी से  आमजन हैरान!
वजह कुछ भी हो लेकिन 

फतेहपुर ।जिले में शासन-प्रशासन की सख़्ती के बावजूद मौरंग का काम करने वाले लोग मनमानी करते रहे हैं।चाहे मौरंग खनन का मामला रहा हो या फिर डंपिंग का! सरकार की खदानों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी मौरंग माफियाओं की काली करतूतों पर लगाम नहीं लगा पाई।जिले में डंपिंग का खेल भी खूब खेला गया। मानक से विपरीत डंपिंग कर राजस्व का चूना लगाया गया। वहीं जिलाधिकारी के आदेश के बाद पूरे जिले में अवैध डंपिंग करने वालों के खिलाफ अभियान चल रहा है और इसमें भी माफिया पकड़ से बाहर हैं जबकि छोटे कारोबारियों पर कार्यवाही का चाबुक चल रहा है।
 जिले में मौरंग खनन के मामले में सरकार की ग्रेडिंग पर फतेहपुर निचले पायदान पर ही रहा है।मौरंग के काले कारोबार को लेकर जिले की फिजा ठीक नहीं रही हैऔर कई बार ऐसे मौके आए हैं जब खदान संचालकों से लेकर प्रशासनिक,पुलिस व खनन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई होती रही है।सूबे में भले ही योगी का राज आ गया हो लेकिन व्यवस्थाएं ज्यों की त्यों हैं। कानून व्यवस्था का बुरा हाल है! भ्रष्टाचार से लोग परेशान हैं! तो दबंगी भी चरम पर चल रही है! आम लोगों के लिए न्याय के दरवाजे बंद हैं! जबकि सत्ताधारी रामराज की बात कर खुद मनमानी व गलत कामों में लिप्त हैं लेकिन जिस तरह से यहां हालात है उससे आमजन को ना तो सुशासन दिख रहा है और ना ही विकास। विभागीय योजनाओं के सहारे जिले में विकास की गंगा बहायी जा रही है। जनपद वासियों की हो रही दुर्दशा पर सत्ताधारी मौन धारण किए हैं। पूर्ववर्ती सरकारों को विकास ना होने का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। *केंद्र में भाजपा की शुरू दूसरी पाली व प्रदेश में 3 साल से अधिक का योगिराज लोगों को अच्छे दिनों का एहसास नहीं करा सका है। बदहाल सड़कें, शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी की समस्याओं से जूझते लोगों के लिए पुलिस मोहकमा भी खलनायक बना बैठा है। 
सत्ता के इशारे पर खाकी कठपुतली बनी है। इसी का नतीजा है कि दबंग गरीबों पर जुल्म ढा रहे हैं। फर्जी मुकदमे लिखा रहे हैं और पीड़ित न्याय की आस में अफसरों की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं भले ही मौरंग खनन का काम बंद हो लेकिन अवैध डंपिंग के कई ऐसे लाइसेंस हैं जिनमें कई सत्ताधारी प्रत्यक्षया अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं और इसी का नतीजा रहा है कि खनन विभाग ने इस ओर देखना ही मुनासिब नहीं समझा। विभाग तो चाहे मौरंग का खनन रहा हो, गंगा बालू का  खनन या फिर मिट्टी का काला कारोबार! अपनी आंख बंद करके ही काम करता रहा है। अवैध खनन से लेकर ओवरलोडिंग तक की हुई कुछ कार्रवाईयां या तो जिलाधिकारी ने किया या फिर उनके निर्देश पर मातहत अधिकारियों ने ।अवैध डंपिंग पर चल रहे अभियान से छोटे कारोबारी ही कार्रवाई की जद में आ रहे हैं।बड़े कारोबारियों ने खदानें बंद होने के बाद से ही डंप की गई मौरंग को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया था। खागा,बिन्दकी सहित सदर तहसील की कई जगहें ऐसी हैं जहां बड़े पैमाने पर मौरंग डंप की गई है कई जगह ऐसी भी हैं जहां लाइसेंस तो हैं लेकिन मानक की धज्जियां उड़ाई गईं हलांकि प्रशासन ने अवैध डंपिंग के खिलाफ अभियान चला रखा है लेकिन मौरंग के बड़े कारोबारी आखिर कारवाई की जद में कब आएंगे। 
सत्ताधारी नेताओं को ना तो जिले के लोगों की समस्याएं दिख रही हैंऔर ना ही बिगड़ी कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार। गैर भाजपा सरकारों में चिल्ल-पों मचाने वाले नेता चुप्पी साधे हैं। आखिर इस चुप्पी का राज क्या है? इस राज को जानने के लिए जिले के लोग भी बेचैन हो रहे हैं कि अच्छे दिनों का सपना दिखाने वाले भाजपाई आखिर उन्हें और कितने अच्छे दिन दिखाना चाहते हैं।