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उत्तरप्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम: साढ़े आठ महीने में 139 पर, 44 अकेले बरेली में, 76 पर गोहत्या के आरोप में लगा रासुका
September 11, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बहराइच में गोहत्या के एक आरोपी पर 6 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगया गया। इसी के साथ प्रदेश में गोहत्या से जुड़े मामलों में रासुका लगने वालों की सूची में एक नाम और जुड़ गया। राज्य में रासुका के आधे से ज्यादा मामले गोहत्या से जुड़े हैं। साढ़े आठ महीने में अबतक 139 लोगों पर रासुका लगाया गया है जिसमें आधे से ज्यादा मामले गोहत्या से जुड़े हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी के एक बयान के अनुसार, इस साल 19 अगस्त तक, यूपी पुलिस ने रासुका के तहत 139 मामले दर्ज़ किए हैं, जिसमें से 76 पर गोहत्या का आरोप है। सबसे ज्यादा मामले बरेली जिले के हैं। 31 अगस्त तक बरेली पुलिस ज़ोन में रासुका के तहत 44 मामले दर्ज़ किए गए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों के मामले में छह लोगों के खिलाफ एनएसए लगाया है। वहीं जघन्य अपराधों के लिए 37 और अन्य अपराधों के लिए 20 लोगों पर रासुका के तहत मामले दर्ज़ किए गए हैं।
इस साल की शुरुआत में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे 13 लोगों को इस अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है। एनएसए के तहत, एक व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है अगर अधिकारियों को लगता है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून और व्यवस्था के लिए खतरा है।
अवस्थी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि उन अपराधों में एनएसए लगाया जाये जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, ताकि अपराधियों में भय और जनता के बीच सुरक्षा की भावना पैदा हो।” एनएसए के अलावा इस साल 26 अगस्त तक उत्तर प्रदेश में गोहत्या निवारण अधिनियम के तहत 1,716 मामले दर्ज किए गए हैं, वहीं करीब 4000 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने में नाकाम रहने के बाद 32 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। इसके अलावा, पुलिस ने 2,384 के खिलाफ यूपी गैंगस्टर्स एक्ट और राज्य में 1,742 के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत आरोप दर्ज़ किए हैं।