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उचित-अनुचित को देखकर भी जो समुचित दृष्टि भाव अपनाते हैं वह है गुरु
October 2, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

उचित-अनुचित को देखकर भी जो समुचित दृष्टि भाव अपनाते हैं वह है गुरु

जलाला मे आयोजित हुआ गुरु सतत महत्ता पर सत्संग 

बिंदकी फतेहपुर।
मलवा विकास खंड के जलाला गाव मे गुरु पूजा एवं गुरु की सत्ता व महत्ता पर सत्संग आयोजित हुआ।एक दिवसीय कार्यक्रम मे प्रवचन व भजनो के माध्यम से विद्वानो ने ज्ञानरस की वर्षा से भक्तो को सराबोर कर दिया।मानस भ्रमर यदुनाथ अवस्थी ने कहा गुरु शब्द में समस्त ज्ञान सत्ता समाहित है और इस ज्ञान सत्ता का अंत नहीं है क्योंकि यह अनन्त दिव्य चक्षु हैं जो उचित-अनुचित को देखकर भी समुचित दृष्टि भाव अपनाते हैं।परंतु जिसे निज अहम् की मैली चादर ने ढक रखा हो उसे इस अनन्त सत्ता को स्वीकारना उसके वश में है ही नहीं। भिन्न भिन्न क्षेत्रों में ज्ञान साधना के भिन्न भिन्न रूप होने के कारण इस गुरु पद के भी भिन्न भिन्न रूप हो गए हैं।वही आचार्य राजेश अवस्थी ने कहा गुरु होने के लिए भी गौरवयुक्त अस्मिता का धारण करना आवश्यक है।गुरु भी समदर्शी,धैर्यवान,निर्लिप्त, स्वावलम्बी,सहिष्णु हो तो ही शिष्य के लिए कल्याणकारी है परंतु शिष्य को भी शिष्यत्व से युक्त होना आवश्यक है जो गुरु के प्रति कृतज्ञ बना रहे न कि कृतघ्न।संचालन आलोक गौड़ ने किया।आयोजक रामशंकर साहू,स्वामी नारदानंद,पप्पू सिंह,राजेंद्र सिंह,बड़कू साहू,शीतलदीन यादव,ओपी,श्रीमोहन,हर्ष गुप्ता आदि रहे।