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टोल प्लाजा के कर्मचारियों द्वारा केंद्र सरकार की गाइडलाइंस का नहीं हो पा रहा पालन 
October 1, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

टोल प्लाजा के कर्मचारियों द्वारा केंद्र सरकार की गाइडलाइंस का नहीं हो पा रहा पालन 
 
नेम प्लेट के साथ यूनिफार्म में नहीं रहते टोल प्लाजा के कर्मचारी 

फतेहपुर।आखिर कब बंद होगी टोल प्लाजा के कर्मचारियों की गुंडई बिना यूनिफार्म नेम प्लेट के कर्मचारियों द्वारा होने वाली गुंडागर्दी के लिए कौन जिम्मेदार! यह सवाल बार-बार उठ रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन न करना और टोल पर लगने वाला जाम भी कर्मचारियों की मनमानी को जगजाहिर करता है। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने वाले अधिकारी भी इन टोल कर्मचारियों के आगे नतमस्तक दिखते हैं।
        *टोल चलाने के लिए केंद्र सरकार के कुछ नियम है।* अब सवाल है कि क्या इन नियमों को यहां फॉलो किया जा रहा है। तो उत्तर मिलता है कि सभी नियमों का पालन नहीं हो रहा। इलाके के ऐसे लोगों को टोल प्लाजा में रखा जाता है जो अच्छी ख़ासी गुंडई कर सकें। अब जब यह कर्मचारी बिना यूनिफार्म और नेम प्लेट के रहते हैं तो फिर इनकी गुंडई देखते ही बनती है। ना तो इन्हें पहचाना जा सकता है न इन्हे नाम से भी जाना जा सकता है। जब कभी मामला पुलिस तक पहुंचता है तो फिर पुलिस नाम बताने की बात कहती है। मगर जब नेम प्लेट ही नहीं होती तो नाम का पता होना नामुमकिन सा हो जाता है। मामला फिर ठंडे बस्ते में ही चला जाता है।
       *टोल प्लाजा चलाने वालों* के लिए यदि नियम की बात करें तो नियम यह कहता है कि पीक आवर्स में लगने वाली कतार में 6 वाहन से अधिक नहीं होना चाहिए। लेकिन जनाब यहा पीक आवर्स की बात कौन करे हर समय 6 से अधिक वाहन लाइन में देखे जा सकते हैं। दूसरा नियम यह कहता है कि 10 सेकंड में वाहन को पास हो जाना चाहिए यदि 3 मिनट से अधिक वाहन के पास होने में लग जाता है तो टोल लेन की संख्या बढ़ानी चाहिए। तीन मिनट की बात तो दूर की बात है  क़भी क़भी तो यहां आधे घण्टे से अधिक वाहन फंसे रहते हैं। एंबुलेंस व प्रशसनिक अधिकारियों का जाम में फसना आम बात रहती है। ऐसे में जब टोल चलाने वाले ही केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस को ना मान रहे हो तो फिर यहां से निकलने वाले वाहनों के साथ नियमों का पालन करवाने के नाम पर बेज्जत करना जैसे इनके अधिकार में हो।
       *सवाल प्रशासनिक अधिकारियों से पूछा जाना चाहिए क्या* टोल प्लाजा में काम करने वाले कर्मचारियों का यूनिफार्म नहीं होना चाहिए और क्या इन्हें नेम प्लेट नहीं लगाना चाहिए इतना ही नहीं इनके चरित्र की जांच पुलिस द्वारा नहीं करानी चाहिए। जब यह सारी औपचारिकता पूरी होंगी तो निश्चित है कि टोल प्लाजा में होने वाली गुंडागर्दी खत्म होगी,वरना व्यापारी हो या फिर पत्रकार और आम आदमी सबके साथ गाली गलौज जैसी बात होना जारी रहेगी और टोल पर लगने वाला जाम लाइलाज मर्ज की तरह लोगों को परेशान करता रहेगा।