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तालाबी नंबर के भूखण्ड पर 07 प्लाट बेचने के बावजूद रामसिंह पर प्रशासन मेहरबान क्यों
October 9, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

तालाबी नंबर के भूखण्ड पर 07 प्लाट बेचने के बावजूद रामसिंह पर प्रशासन मेहरबान क्यों
 
हाईकोर्ट का आदेश अवमानना की नोटिस के बावजूद ईओ नगर पालिका व राजस्व विभाग कार्यवाही के प्रति गंभीर नहीं, लेखपालों ने भी किया खेल
     
फ़तेहपुर। एक- दो बार नहीं तीन- तीन बार उच्च न्यायलय की अवमानना नोटिस और तालाबी नम्बर वाले भूखण्ड को खाली करवाने के स्पष्ट आदेश के बावजूद राजस्व विभाग के कर्ता-धर्ता एवं ईओ नगर पालिका परिषद (फतेहपुर) कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। गोचर, पशुचर, तालाब एवं ग्राम समाज आदि की सरकारी ज़मीनो से अवैध कब्जे हटवाने के बाबत शासन- प्रशासन कितने भी दावे क्यो न कर ले, किन्तु जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
 गौरतलब है कि वीआईपी रोड स्थित पृथ्वीपुरम (हबीबपुर) में राम सिंह नाम का एक ऐसा खिलाड़ी है, जिसने विशुद्ध तालाबी नम्बर की नौ बिस्वा से कहीं ज्यादा ज़मीन का सात अलग अलग लोगों को बाक़ायदे बैनामा कर दिया और पुलिस एवं राजस्व विभाग से सेटिंग करके क़ब्ज़ा भी दिला दिया। जहा पर आलीशान मकान भी खड़े हो गए है।
 दस्तावेज़ो के मुताबिक़ शहर के पृथ्वीपुरम (हबीबपुर) निवासी राम सिंह पुत्र स्व० राम औतार ने इस क्षेत्र में अपनी कई बीघे पैतृक ज़मीन की आड में खसरा संख्या 1500 (तालाबी नम्बर) जिसका क्षेत्रफल 0.0730 (लगभग नौ बिस्वा) है। राम सिंह ने सात अलग-अलग लोगों को इस तालाबी नम्बर वाली ज़मीन को नम्बर में खेल करके बैनामा कर दिया। रजिस्ट्री में भूमि नम्बर 1499 दर्ज किया गया। क्योंकि मौक़े पर बैनामे में दिखाए गए नंबर की ज़मीन थी ही नहीं, इसलिये बासकल तालाब की ज़मीन नम्बर 1500 पर कई लोगों का क़ब्ज़ा भी करा दिया गया। राम सिंह ने विगत 28 दिसम्बर 2015 को शकुन्तला देवी पत्नी राम बहादुर पाल निवासी ग्राम कल्यानपुर मजरे मोहनखेड़ा एवं 18 जनवरी 2017 को रीता देवी पत्नी धीरेंद्र प्रकाश निवासी ग्राम जुगुल का पुरवा मजरे असनी को भी बैनामा किया, जिन्होंने तालाब की ज़मीन पर कई कई मंज़िला निर्माण भी करवा लिया है।
राम सिंह लोधी के इस गड़बड़झाले से उनके अन्य भाई इत्तेफ़ाक नहीं रखते। कई बार ज़िला एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों से शिकायत के बावजूद जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो उच्च न्यायालय की शरण ली। हाईकोर्ट ने ज़िला प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिया किन्तु घाघ सिस्टम की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। नतीजतन शिकायतकर्ता तीन बार और हाईकोर्ट गये, कंटेम्ट भी हुआ किंतु करवाई के बाबत किसी ने सुध नहीं ली। विगत 01 अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट ने नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को उपरोक्त तालाबी नम्बर की ज़मीन तुरन्त ख़ाली करवाने के लिये पुनः आदेशित किया, किन्तु मौक़े पर स्थिति अभी भी  पूर्ववत् ही है।
 उक्त तालाबी नम्बर की ज़मीन के बाबत एक अन्य जानकारी के अनुसार संबंधित लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खेल किया है। कहते है उच्चाधिकारियों के समक्ष जो नक़्शा पेश किया गया है, उसमें सेटिंग गेटिंग के चलते बने माकानो को काटकर दिखाया गया है। इस रिपोर्ट में 09 बिस्वा की तालाबी नम्बर वाली ज़मीन में भी भ्रम की स्थिति बनाने का भरपूर प्रयास किया गया है।
योगी राज में यह सबसे बड़ा समसामयिक सवाल है, जिसपर जवाबदेहो को आज न सही कल पीछे मुड़कर देखना ही पड़ेगा...! इस मामले में अधिकारियो का मौन अन्दर खाने की काफ़ी कुछ कहानी स्वतः बया कर देती है।