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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस, कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली याचिका पर मांगा जवाब
October 12, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली, कृषि कानूनों को लेकर सप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। बिलों को चुनौती देने वाली इन याचिकाओं पर कोर्ट ने केंद्र से चार हफ्तों के अंदर जवाब देने को कहा है।

कांग्रेस ने दायर की याचिका

केरल में कांग्रेस से सांसद टीएन प्रथापन ने कृषि कानून के विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। केरल के त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद टीएन प्रथापन ने इन बिलों को लेकर आरोप लगाया था कि यह किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 द्वारा समानता का अधिकार व भेदभाव का उल्लंघन है। कांग्रेस सासंद ने कहा था कि कानून जिसे राष्ट्रपति की सहमति दी गई वह असंवैधानिक, अवैध और शून्य के रूप में माना जा सकता है।

झारखंड में कृषि कानूनों का विरोध

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कृषि कानून का विरोध करते हुए इसे किसानों के लिए काला कानून बताया है। पार्टी के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने शनिवार को प्रेसवार्ता में इस कानून का विरोध किया और घोषणा की कि राज्य में किसी भी कीमत पर इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। इससे किसानों की किसानी मर जाएगी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ऐसा नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि जिस राज्य में भाजपा का शासन है, वहां के किसान भी इस कानून का विरोध कर रहे हैं। पूरे देश में इस काला कानून का विरोध हो रहा है।

बता दें कि केंद्र की तरफ से लाए गए कृषि कानूनों का कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं। इसके चलते पिछले दिनों कानूनों के विरोध में देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब में किसानों ने रेलवे ट्रैक पर बैठकर अपना विरोध जताया तो वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्रैक्टर पर बैठकर पंजाब में रैली निकाली। इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए गए।