ALL राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य राजनीति अपराध विशेष विज्ञापन दुनिया कोविड-19 (कोरोना वायरस)
सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश- पैतृक संपत्ति पर बेटी को बराबर का अधिकार
August 11, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • राष्ट्रीय

नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने पैतृक संपत्ति पर बेटियों के हक को लेकर अहम फैसला दिया है। अपने अहम आदेश में कोर्ट ने कहा है कि संशोधित हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटों की तरह बेटियों का भी पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार है। जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने कहा कि अगर कानून लागू होने से पहले ही पिता की मृत्यु हो गई हो तो भी बेटी को संपत्ति पर अधिकार मिलेगा।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि बेटी हमेशा अपने पूरे जीवन के लिए एक प्यारी बेटी होती है। पीठ ने कहा कि बेटियों के पास पैतृक संपत्ति पर भी अधिकार होगा, भले ही हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के लागू होने से पहले पिता की मृत्यु हो गई हो।

कोर्ट ने कहा कि 9 सितंबर 2005 के पहले और बाद से बेटियों के हिंदू अविभाजित परिवार की संपत्तियों में हिस्सा मिलेगा। अगर बेटी जिंदा नहीं है तो उसके बच्चे संपत्ति में हिस्सेदारी पाने के योग्य समझे जाएंगे। कोर्ट ने कहा, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी जिंदा है या नहीं। यह हर हाल में लागू होगा।

 

बता दें कि साल 2005 में कानून बना था कि बेटा और बेटी दोनों के पिता की संपत्ति पर बराबर का अधिकार होगा। लेकिन, इसमें यह स्पष्ट नहीं था कि अगर पिता की मृत्यु 2005 से पहले हुई है तो यह कानून ऐसे परिवार पर लागू होगा या नहीं। कोर्ट ने साफ करते हुए कहा कि कहा कि पिता की मृत्यु से इसका कोई लेन-देन नहीं है। अगर पिता 9 सितंबर, 2005 को जिंदा नहीं थे, तो भी बेटी को उनकी पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा। यानी, 9 सितंबर, 2005 से पहले पिता की मृत्यु के बावजूद बेटी का हमवारिस होने का अधिकार नहीं छिनेगा।