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सुखोई, जगुआर, मिराज लड़ाकू जेट के साथ अपाचे व चिनूक हेलिकाप्टर सीमा पर तैनात
June 20, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • राष्ट्रीय

नई दिल्ली। लद्दाख की पूर्वी सीमाओं पर चीन के साथ बढ़े तनाव के बीच सेना के बाद वायुसेना ने चीन से लगे सभी अग्रिम मोर्चो पर हाई अलर्ट के साथ अपने लड़ाकू विमानों और हेलीकाप्टरों की तैनाती बढ़ा दी है। इसमें वायुसेना के सबसे आधुनिक लड़ाकू जेट सुखोई, जगुआर के साथ मिग विमान के साथ अपाचे और चिनूक हेलीकाप्टरों को भी लेह-लद्दाख के इलाकों में तैनाती बढ़ा दी है।

 

वायुसेना अध्यक्ष एयरचीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने गलवन घाटी की घटना के अगले ही दिन बुधवार को दो दिनों के लिए लेह एयरफोर्स बेस पहुंच कर अग्रिम मोर्चे पर सुरक्षा चुनौती की समीक्षा की। सेना की अग्रिम मोर्चे पर बढ़ी तैनाती के बाद वायुसेना के भी हाई अलर्ट से साफ है कि गलवन की घटना को लेकर चीन से गहराया तनाव का समाधान निकालने के लिए भारत किसी सूरत में अब नरमी दिखाने को तैयार नहीं है।

गलवन घाटी में चीन की दगाबाजी के बाद अत्यधिक सचेत वायुसेना ने चीन से लगी 3500 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा के सभी अग्रिम मोर्चे के एयरफोर्स बेस को हाई अलर्ट पर रखा है। लेह-लद्दाख व श्रीनगर के साथ हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के चीन से लगे सभी अग्रिम मोर्चो पर भी वायुसेना के लड़ाकू जेट व हेलीकाप्टर हाई अलर्ट मोड में हैं। एलएसी के करीब लेह-लद्दाख के अग्रिम मोर्चो पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को कई उड़ानें भी भरी।

तीनों सेनाओं के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया निर्णय

सूत्रों के अनुसार मंगलवार की घटना के उपरांत सरकार और तीनों सेनाओं के बीच हुई बैठकों के बाद वायुसेना प्रमुख ने बुधवार को ही दो दिन के लिए लेह-श्रीनगर का दौरा कर हालात की समीक्षा की। वायुसेना ने इसके सुखोई-30 एमकेआई, जगुआर, मिराज-200 से लेकर अपाचे व चिनूक जैसे हेलीकाप्टरों की संख्या और लेह-श्रीनगर में तैनाती बढ़ा दी गई है। समझा जाता है कि अग्रिम मोर्चे पर बढ़े तनाव के मद्देनजर ही वायुसेना ने शुक्रवार को अपने जेट और हेलीकाप्टरों की इन इलाकों में उड़ानें बढ़ा दी।

सूत्रों के अनुसार गलवन घाटी में चीनी सैनिकों से हुई हिंसक झड़प के दूसरे ही दिन रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से हुई मंत्रणा में अग्रिम मोर्चे पर सेना के साथ वायुसेना को भी फारवर्ड पोस्ट पर दोहरी तैनाती मजबूत करने के लिए लगाने का निर्णय लिया गया।

चीनी पीएलए को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सेना तैयार

बताया जाता है कि गलवन घाटी के पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर जहां हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे वहां तनाव अब भी काफी गहरा है और चीनी सैनिक गलवन घाटी से अभी तक नहीं निकली है। गलवन घाटी पर चीन के दावे को सिरे से खारिज कर चुका भारत सोमवार-मंगलवार की घटना को देखते हुए भारतीय सेनाएं चीनी पीएलए की ऐसी किसी दूसरी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पुख्ता सर्तकता बरत रही हैं। इसके मद्देनजर ही अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और असम में वायुसेना ने अपने अग्रिम एयरबेसों पर अतिरिक्त लड़ाकू साजो-समान पहुंचा दिया है। वायुसेना की यह चौकसी इसीलिए भी अहम है कि एलएसी के उस पर तिब्बत के इलाके के अग्रिम मोर्चो पर चीनी एयर फोर्स की सक्रियता नोटिस की गई है। सेटेलाइट तस्वीरें से पता लगा है कि तिब्बत के कुछ अग्रिम मोर्चो पर चीन अपने इलाके में बुनियादी ढांचे का तेजी से निर्माण कर रहा है जो पैंगोंग झील से ज्यादा दूर नहीं है जहां चीनी सेना ने अतिक्रमण किया है।

बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई

लेह-लद्दाख के अलावा सेना ने पहले ही हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड चीन से लगी एलएसी के सभी फारवर्ड पोस्ट पर पूरे मिलिट्री साजो-सामान के साथ बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। अभी भी कुछ इलाकों में सैनिकों के पहुंचने का सिलसिला जारी है और इसके मद्देनजर ही सैनिकों की सामान्य छुट्टियां रद कर दी गई है। नौसेना को भी हिन्द महासागर में चीन की चालबाजी से सतर्क रहते हुए हाई अलर्ट मोड़ में रहने को कहा गया है। हिन्द महासागर में चीनी नौसेना की पहले से जारी अति सक्रियता को देखते हुए भारतीय नौसेना का मौजूदा तनाव के समय में अलर्ट होना अपरिहार्य है।

भारतीय सेनाओं का रुख इसीलिए कठोर

गलवन की घटना के बाद चीनी दुस्साहस को लेकर भारतीय सेनाओं का रुख इसीलिए भी कठोर है क्योंकि पीएलए ने भारतीय सैनिकों के साथ नियम-कायदों से इतर जाकर बर्बर हिंसा की। सरकार और सेना के नेतृत्व से भी तीनों सेनाओं को चीन को उसकी ऐसी हरकत का उसी अंदाज में जवाब देने का स्पष्ट निर्देश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में तीनों सेनाओं के हर चुनौती का माकूल जवाब देने की पूरी तैयारी की बात कह सरकार और सेना के इरादे साफ कर दिए।