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सिखों पर हो रहे हमले बर्दाश्त नही : कुलदीप सिंह भोगल
June 22, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


न्यूज आफ फतेहपुर
कानपुर,22जून।


अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी 1984 के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगल और राष्ट्रीय महासचिव सुरजीत सिंह ओबराय द्वारा साझा बयान जारी करते हुए  मीडिया को बताया कि बीते दिन प्रदेश के अमरोहा  में एक सिख युवक की बेरहमी से पिटाई की गई और उसकी पगड़ी और केशों के साथ बेअदबी की गई और उससे पहले बिजनौर की नगीना तहसील के अंतर्गत चम्पतपुर गांव,लखीमपुर व रामपुर में तीन पीढ़ी से बसे सिखों को उजाड़ा गया वो शर्मनाक है। इन सब घटनाओं से सिखों में बहुत ज्यादा रोष व्याप्त है  ।बयान में ये भी कहा गया कि यही नही बल्कि देश भर में पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार खबरे    आई कि जगन्नाथ पुरी में सिखों के पुरातन मठ को तोड़े जाने के बाद तिलनगाना के झम्बल ,मंदचल, और मलका गिरी में सिखों को घर से बेघर और भुखमरी का शिकार खेतो के छिन जाने के कारण होना पड़ा और उसके तुरंत बाद उत्तराखंड की खटीमा तहसील की उलाई गाँव मे सिख किसानों की 100 एकड़ खेती और फसल जब्त कर ली गई।  इसके बाद  मध्यप्रदेश में 500 सिख परिवारों का मामला और अब उत्तर प्रदेश के तराई इलाको में  सिखों के गांवो को निशाना बनाया गया जो  बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है । बयान में कहा गया कि ऐसा लगता है कि कोई बड़ी साजिश 

केंद्र सरकार के खिलाफ तो नहीं की जा रही है ताकि सिख समाज में केंद्र सरकार के प्रति असंतोष व्याप्त हो। बयान में ये भी कहा गया कि केंद्र बिंदुवार सारे प्रकरण को जोड़ते हुए सिखों के प्रति चल रही किसी भी प्रकार  साजिशों का पर्दाफाश करे । इसके साथ ही सभी राज्य सरकारों को ये भी हिदायत दे कि सिखों के प्रति हो रही दुर्भाग्यपूर्ण रवैये को तुरंत संज्ञान में लेकर अविलम्ब त्वरित कार्यवाही करें । अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाले सिख वर्ग पहले भी 1947 और जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार में फिर नवम्बर 1984 में  लाखो घरों को लूटा और हजारों सिखों को मौत के घाट उतारा दिया गया जिसका आज तक इंसाफ नही मिला और 35 साल हो गए इंसाफ की राह देखते हुए  और इन सब मामलों की आड़ में  ही विदेशी ताकते खालिस्तान के नाम से भडकाने का कार्य करती आई है जिसका अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी 1984 पुरजोर विरोध करती आई है और ऐसी मंशा वालो को देश ,पंथ , कौम , समाज का दुश्मन मानती आई है और आज भी मुंह तोड़ जवाब कमेटी दे रही है कमेटी ऐसी नापाक हरकतों को कभी सफल नही होने देगी  लेकिन इन सब के बाद भी आज भी आशा पूर्ण तरीके से सिख समाज ने हमेशा सरकार और समाज मे अपना योगदान दिया है और अपना पूरा योगदान इस कोरोना काल मे भी समाज को दे रहा है ऐसे में इस प्रकार का निराशा जनक रवैया सिख समाज  को प्रतिफल के रूप में मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है इसे अब केंद्र सरकार को संज्ञान में लेकर रोका जाना चाहिए । सिख समाज ये उम्मीद  केंद्र की मोदी सरकार से और उत्तर प्रदेश में योगी सरकार से ही कर सकता है हम मांग करते है कि केंद्र देश भर के समस्त मामलों को संज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही करें और उचित आदेश जारी करे।