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शिवराजपुर में बही ज्ञान की गंगा श्रद्धालु रहे मंत्रमुग्ध
November 4, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

शिवराजपुर में बही ज्ञान की गंगा श्रद्धालु रहे मंत्रमुग्ध
----- देवी विष्णु प्रिया शास्त्री ने कहा अहंकार से होता नाश
बिंदकी फतेहपुर
मनुष्य चाहे जितनाआर्थिक और  जन बल तथा आर्थिक रूप से मजबूत हो जाए लेकिन कभी अभिमान नहीं करना चाहिए क्योंकि अभिमान करने के बाद मनुष्य में राक्षसी प्रवृत्ति हो जाती है और यहीं से उसका विनाश का कारण बने लगता है यह बात मलवा ब्लाक क्षेत्र के शिवराजपुर गांव में चल रहे श्री भागवत कथा में देवी विष्णु प्रिया शास्त्री द्वारा छठवें दिन ज्ञान की गंगा बहाते हुए कहा
       उन्होंने कहा समाज में दुष्टों की सत्ता चाहे जितनी प्रबल हो लेकिन वह कभी किसी भी कार्य में विजय प्राप्त नहीं कर सकते सत्य और अहिंसा के मार्ग में चलने और समर्पण की भावना रखने से ही जीवन में सफलता मिलती है। इसलिए इस बात को मनुष्य को ध्यान रखना चाहिए कि कभी अभिमान नहीं करना चाहिए जिस दिन व्यक्ति अभिमान करना शुरू कर देगा तो निश्चित रूप से वह इंसान नहीं राक्षसी प्रवृत्ति का हो जाएगा और वह अत्याचार करना शुरू कर देगा और जब वह अत्याचार शुरू कर देगा तो निश्चित रूप से उस अभिमानी कोई व्यक्ति का नाश होना सुनिश्चित हो जाएगा प्रभु राम रूपी कोई न कोई महापुरुष उसके अभिमान को ही नहीं नष्ट करेगा बल्कि उसके अस्तित्व को भी समाप्त कर देने का काम करेगा इस मौके पर ज्ञान की गंगा बहाते हुए छी छा निवासी बाबा विनोद उर्फ उघारा नंद ने कहा क्रोध सबसे ज्यादा विनाश एवं पतन का का कारण है इसलिए मनुष्य को क्रोध कभी नहीं करना चाहिए शांति से और प्यार स्नेह से बड़ी सी बड़ी समस्याएं हल हो जाती है जबकि क्रोध से छोटी समस्या विकराल हो जाती है और उसके परिणाम बहुत ही खराब होते हैं उन्होंने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है कि ऐसा कोई कार्य न करें जिससे किसी अगले व्यक्ति के हृदय में चोट लगी तो निश्चित रूप से मनुष्य में दो तरह की प्रवृत्ति होती है एक देवता प्रवृत्ति और दूसरी राक्षसी प्रवृत्ति देवता प्रवृत्ति लोगों की भले के लिए काम करता है और निश्चित रूप से उसे ही परमात्मा कहते हैं और राक्षसी प्रवृति के लोग हमेशा गलत कार्य करते हैं दूसरों के बारे में गलत सोचते हैं और नकारात्मक सोच रखते हैं निश्चित रूप से ऐसे लोग भले ही समाज को धोखा देकर अपना ऊपरी हाव-भाव चमक-दमक दिखाने लगे लेकिन आंतरिक सुख कभी प्राप्त नहीं कर पाते हैं इसलिए सभी को ऐसे कार्य करना चाहिए लोगों की सहायता करना चाहिए कि निश्चित रूप से उसके मुख से उसके अंतरात्मा से निकल जाए कि अरे यह व्यक्ति तो मेरे लिए भगवान हो गया