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शारदीय नवरात्रि हेतु शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधान
October 16, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

शारदीय नवरात्रि हेतु शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधान

नवरात्रि यानी कि नौ रातें, शरद नवरात्र  हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक हैं जिसे दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि  के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग देवी के नौ रूपों की आराधना कर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं।

शारदीय नवरात्र
 पंचाग  के अनुसार यह नवरात्रि शरद ऋतु में अश्विन शुक्‍ल पक्ष से शुरू होती हैं और पूरे नौ दिनों तक चलती हैं। महावीर पंचाग के अनुसार यह त्‍योहार हर साल सितंबर-अक्‍टूबर के महीने में आता है। इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्‍टूबर तक है। 26 अक्‍टूबर को विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा।

17 अक्टूबर  पहला दिन* (प्रतिपदा) *शैलपुत्री पूजन

18 अक्टूबर द्व‍ितीया* _बह्मचारिणी पूजन_

19 अक्टूबर तृतीया* _चंद्रघंटा पूजन_

20 अक्टूबर चतुर्थी* _कुष्‍मांडा पूजन_


21 अक्टूबर पंचमी* _स्‍कंदमाता पूजन_

*22 अक्टूबर षष्‍ठी* _सरस्‍वती पूजन_

*23 अक्टूबर सप्‍तमी* _कात्‍यायनी पूजन_

*24 अक्टूबर अष्‍टमी* _कालरात्रि पूजन_

*25 अक्टूबर नवमी* _महागौरी पूजन, कन्‍या पूजन, नवमी हवन, नवरात्रि पारण_

*कलश स्‍थापना की तिथि व शुभ मुहूर्त*

कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त: 17 अक्टूबर 2020 को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।

कुल अवधि: 03 घंटे 49 मिनट तक रहेगी।

*कलश स्‍थापना की सामग्री*
मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें। इसके अतिरिक्त कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्‍के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए।

*कलश स्‍थापना विधि*
*नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्‍नान कर लें।

*मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्‍योत जलाएं। कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं।

*अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्‍वास्तिक बनाएं. लोटे के ऊपरी हिस्‍से में मौली बांधें।

*अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं। फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें।

*इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं।

 *अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें। फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें।

*अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं।

*आप चाहें तो कलश स्‍थापना के साथ ही माता के नाम की अखंड ज्‍योति भी जला सकते हैं।

*पं कुलदीप शुक्ल(ज्योतिर्विद)*

*संपर्क सूत्र*
*_7355109976_*