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सीएम साहब! सिस्टम पर भारी है फतेहपुर में भू-माफिया
June 26, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


फतेहपुर शहर में प्रशासन की नाक के नीचे सैकड़ों करोड़ की सरकारी जमीनों को अभिलेखों में हेर-फेर करके भू माफिया निगलते जा रहे हैं।खेल बहुत बड़ा है। पालिका और प्रशासन के जिम्मेदार मौन हैं।
करोड़ों की शत्रु सम्पत्ति को बेंच चुका है माफिया!
विभाजन के बाद देश छोड़कर पाकिस्तान गये परिवारों की भू सम्पत्ति जिसे शत्रु सम्पत्ति या कस्टोडियन कहा जाता है को माफिया ने हड़पने का नायाब तरीका निकाला।पहले अभिलेखागार के पूर्व कर्मी के माध्यम से पुराने अभिलेखों में कूट रचना कराती गयी फिर उस जमीन के दो दावेदार तैयार करके मामला दीवानी ले जाया गया,  एक दावेदार के बैक होने के बाद न्यायालय से एक पक्षीय फैसला पा लेने के बाद नये राजस्व अभिलेखों में कोर्ट आर्डर दर्ज कराने के बाद जमीनों की बिक्री कर दी गयी।
तालाबों सहित सरकारी जमीनों को भी निगलता जा रहा है माफिया!
तालाबों की नवैय्यत(लैंड यूज) और उसे प्राचीन अभिलेखों में हेराफेरी करके भूमिधरी दर्ज कराने के साथ ही तालाब,सार्वजनिक, सुरक्षित और सरकारी जमीनें देखते ही देखते माफिया निखरता जा रहा है। हैरतअंगेज यह कि ऐसी तमाम सरकारी जमीनों पर न्यायालय में चलने वाले मामलों की जानकारी बडे़ अधिकारियो तक या तो जा नहीं पाती और यदि पहुंची भी तो लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक अभिलेखीय आधार पर माफिया को सही ठहराने और उस अधिकारी को पटाने के साथ ही मामले का अंत कर दिया जाता है।
मंदिर,चर्च और कब्रिस्तान की जमीनों की जमीनों पर भी संकट
माफिया ने प्राचीन मंदिरों और चर्चों की जमीनों सहित कब्रिस्तानों को भी नहीं छोड़ा।शहर की अयोध्या कुटी,कालिकन कुटी के साथ ही क्रिश्चियन सोसायटी की लालकोठी की जमीन हड़पने के बाद डेढ़ सौ वर्ष पुराने प्रेस बेटीरियन चर्च की  जमीन भी पांच वर्ष पूर्व माफिया ने अनाधिकृत व्यक्ति से कृय दिखाकर बेंचने की जुगत भिड़ाई थी लेकिन मीडिया खबरों का संज्ञान लेकर तत्कालीन प्रशासन ने सख्ती से माफिया के कब्जे को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया था।
पूर्व डीएम समझ गये थे माफिया की माडस ऑपरेण्डी!
जिले के दो वर्ष पूर्व डीएम रहे अंजनेय सिंह  माफिया के अभिलेखागार से लेकर अदालतबाजी और राजस्व ,पालिका और प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को पटाकर शत्रु सम्पत्तियों,सुरक्षित सरकारी एवं सार्वजनिक भूमियों को हड़पने की कार्यशैली समझ ग्रे थे।इस खेल में शामिल की किरदार जेल भी भेजे गये थे।माफिया खेमें में हड़कंप था लेकिन आंजनेय सिंह के स्थानान्तरण में रामपुर जाते ही ऐसी जमीनों पर कब्जे पुख्ता किये जाने लगे हैं। 
सुप्रीम कोर्ट और सरकार के निर्देश भी नहीं बचा पा रहे ऐतिहासिक तालाबों का अस्तित्व
शहर के बीच अपनी खास पहचान रखने वाले विक्टोरिया तालाब और कूंड तालाब सहित अनेक तालाब या तो खत्म हो गये हैं या सिकुड़ते हुए खत्म होने की कगार पर हैं।शहर के मुख्य मार्ग से जुड़े कूंड तालाब के बडे़ क्षेत्र में एक फर्नीचर वाले के बाद एक अन्य ने टीन से घेराबंदी करके अंदर अंदर तेजी से निर्माण कार्य जारी कर रखा है। पुरानी तहसील, जिला अस्पताल और नगरपालिका की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर तालाबी/सरकारी सुरक्षित भूमि पर हो रहे कब्जे पर   नगर पालिका के जिम्मेदारों से लेकर  तहसील/राजस्व विभाग, जिला प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की चुप्पी हैरान करने वाली है। 
सवाल थोड़े कड़वे हैं?
१-योगी राज में सरकारी और सार्वजनिक भूमियों की माफिया द्वारा की जा रही लूट पर क्या जिला प्रशासन संज्ञान लेकर ऐसी भूमियों के संरक्षक होने का दायित्यबोध महसूस करेगा?
२-क्या जिला प्रशासन शहर क्षेत्र की ऐसी तालाबी और कस्टोडियन जमीनों को माफिया से मुक्त कराने की इच्छाशक्ति दिखायेगा जो पूर्व में राजस्व अभिलेखों में ओवरलैपिंग और कूटरचना कराकर हड़पी गयी हैं?