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SC ने पूछा, क्या पराली के धुएं से मर जाएगा कोरोना वायरस, मांगे कुछ निष्पक्ष विशेषज्ञों के नाम
October 6, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली,  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सवाल किया कि क्या पराली जलाने से उठने वाले धुएं से कोरोना वायरस मर जाएगा। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे ने यह सवाल उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान किया जिसमें पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाए जाने का मुद्दा उठाया गया है।

जवाब में याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि धुएं से कोरोना वायरस मरेगा नहीं बल्कि स्थिति को और खराब करेगा और इसके प्रसार में मदद ही करेगा।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह पंजाब और हरियाणा सरकार को पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दे जो सामान्यत: इन राज्यों में सितंबर और दिसंबर के बीच जलाई जाती है। यह याचिका कानून के छात्र अमन बांका और 12वीं के छात्र आदित्य दुबे ने दायर की है।

इस मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि पराली जलाने से रोकने के लिए कदम उठाने का आश्वासन देने के बावजूद राज्य कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने विकास सिंह से पराली जलाने के मसले पर विशेषज्ञों के नाम बताने को कहा। साथ ही कहा, 'कुछ निष्पक्ष लोगों की जरूरत है।'

शीर्ष अदालत ने विकास सिंह से यह सवाल भी किया कि बहुत पहले अदालत आने के बजाय वह इतनी देर से क्यों आए, इस पर उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की तस्वीरें देखीं जिसमें कई स्थानों पर पराली को जलते हुए देखा जा सकता है। याचिका के मुताबिक, यह रिकॉर्ड पर है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली के धुएं का योगदान करीब 40 फीसद होता है। 

दरअसल इन्हीं दिनों में यहां पर फसलों की कटाई की जाती है उसके बाद जो अवशेष बच जाता है उसे किसान जला देते हैं। इसे जलाने के लिए किसानों का अपना तर्क है। वो कहते हैं कि पराली का वो इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं वो बेकार होती है किसी काम की नहीं होती, इस वजह से उसे जलाया जाता है। बड़े पैमाने पर जलाए जाने से दिल्ली और आसपास के लोगों के लिए सांस लेने में समस्या हो जाती है।