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SC का मकान खरीदारों के पक्ष में अहम फैसला- कानून के बावजूद रीयल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ जा सकते है कोर्ट
November 4, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

SC का मकान खरीदारों के पक्ष में अहम फैसला- कानून के बावजूद रीयल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ जा सकते है कोर्ट

(न्यूज़)।सुप्रीम कोर्ट ने मकान खरीदारों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि रीयल एस्टेट कंपनियों से जुड़े मामलों को देखने के लिये 2016 में बना विशेष कानून रेरा के बावजूद मकान खरीददार घरों को सौंपने में देरी को लेकर संबंधित कंपनी के खिलाफ पैसा वापसी और क्षतिपूर्ति जैसे मामलों को लेकर उपभोक्ता अदालत में जा सकते हैं.
शीर्ष अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी मेसर्स इम्पेरिया स्ट्रक्चरर्स लि. की इस दलील को खारिज कर दिया कि रीयल एस्टेट (नियमन और विकास) कानून के अमल में आने के बाद निर्माण और परियोजना के पूरा होने से जुड़े सभी मामलों का निपटान इसी कानून के तहत होना है और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग को इससे जुड़ी उपभोक्ताओं की शिकायतों पर विचार नहीं करना चाहिए.
न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायाधीश विनीत सरन की पीठ ने विभिन्न फैसलों का उल्लेख किया और कहा कि हालांकि एनसीडीआरसी के समक्ष कार्यवाही न्यायिक कार्यवाही है, लेकिन दिवानी प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत आयोग दिवानी अदालत नहीं है. न्यायाधीश ललित ने 45 पृष्ठ के आदेश में कहा, इसमें दिवानी अदालत के सभी गुण हो सकते हैं, लेकिन फिर भी इसे दिवानी अदालत नहीं कहा जा सकता है. लेकिन रेरा कानून की धारा 79 उपभोक्ता आयोग या मंच को उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रावधानों के तहत शिकायतों की सुनवाई से प्रतिबंधित नहीं करती।