ALL राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य राजनीति अपराध विशेष विज्ञापन दुनिया कोविड-19 (कोरोना वायरस)
सर्वे के बाद अब फतेहपुर में डाल्फिन सेंचुरी बनाने का हुआ निर्णय
July 27, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

सर्वे के बाद अब फतेहपुर में डाल्फिन सेंचुरी बनाने का हुआ निर्णय

फ़तेहपुर। जनपद के लिए बड़ी खबर है कि प्रयागराज के लोगों को डाल्फिन के साथ खेलने के लिए अब फतेहपुर आना होगा। पहले संगम के पास डाल्फिन सेंचुरी बनाए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन सर्वे के बाद अब वह फतेहपुर शिफ्ट हो गया है। हालांकि, उसकी जगह प्रयागराज के लोगों को तरह-तरह के कछुए देखने का मौका मिलेगा। मेजा में कछुआ सेंचुरी का रास्ता साफ हो गया है। 
पहले संगम के आसपास में बड़ी संख्या में डाल्फिन के पाए जाने की बात कही जा रही थी। 
प्रारंभिक सर्वे में इसके काफी उत्साहजनक परिणाम भी सामने आए थे। यहां पर गंगा का जल भी डाल्फिन के अनुरूप बताया गया था। इसे देखते हुए संगम के आसपास बड़े क्षेत्र में डाल्फिन सेंचुरी बनाने का निर्णय लिया गया था। इसका खाका तैयार करने से पहले एक बार फिर सर्वे कराया गया। 
बाद के सर्वे में पाया गया कि फतेहपुर की सीमा में गंगा नदी में डाल्फिन की संख्या अधिक है। इसके अलावा वहां जलीय पर्यावरण भी उनके अनुकूल है। कई अन्य वजहों से भी फतेहपुर में डाल्फिन सेंचुरी बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। मंडलायुक्त आर. रमेश कुमार ने बताया कि  इसके लिए आदेश हो चुका है। आगे की प्रक्रिया भी शुरू है।
उधर कछुआ सेंचुरी के लिए गंगा नदी में मेजा के नेवादा गांव से मिर्जापुर की तरफ 30 किमी तक का क्षेत्र संरक्षित किया जाएगा। इसकी सीमा नदी के दोनों छोर तक होगी। इस तरह से इसमें प्रयागराज के अलावा मिर्जापुर और भदोही का क्षेत्र भी शामिल होगा।
 सेंचुरी क्षेत्र में किसी का कोई अधिकार बनता है तो उसका निस्तारण डीएम के माध्यम से किया जाएगा। पर्यटन क्षेत्र के रूप में होगा विकसित डॉल्फिन व कछुआ सेंचुरी तथा आसपास का इलाका पर्यटन के रूप में विकसित होगा।
 इसके लिए नदी के दोनों किनारों पर तो विकास होगा ही कई जगह पर्यटक जोन भी बनाया जाएगा। इसमें पार्क होगा, जिसे जंगल का रूप दिया जाएगा। 
इसके अलावा पर्यटकों के लिए वहीं से वोटिंग की सुविधा होगी। वहां से पर्यटक सेंचुरी क्षेत्र में जा सकेंगे और अलग-अलग प्रजाति की डॉल्फिन व कछुओं के अलावा मगरमच्छ, घडिय़ाल, मछलियां आदि देख सकेंगे। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से जगह-जगह वन रक्षक चौकियां भी बनाई जाएंगी।