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सर्पदंश से होने वाली जनहानि को लेकर जिलाधिकारी ने दिए निर्देश
July 1, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • विशेष

फतेहपुर।

सर्पदंश के कारण होने वाली जनहानि के न्यूनीकरण एवं शमन से सम्बंधित गाइडलाइन के अनुसार निम्न कार्यवाही करने के निर्देश जिलाधिकारी श्री संजीव सिंह ने दिए है-
सर्पदंश हेतु सामान्य दिशा-निर्देश
● सांप दो प्रकार के होते हैं-1 जहरीले एवं 2-बिना जहर वाले ।
●वर्षा ऋतु में अक्सर यह बाहर निकल आते हैं एवं खेतों में पत्थरों और चट्टानों के बीच कच्ची दीवारों में अथवा लकड़ियों का गट्ठर जैसी चीजों में छिपे रहते हैं घरों में भी यह कभी कभी आकर कोने सामानों इत्यादि के बीच अथवा पीछे1 छिप जाते है। अधिकांश सांप मांसाहारी होते हैं एवं छोटे जीव जंतुओं को खाते हैं । मनुष्य को यह अपने ऊपर खतरा देख कर ही काटते हैं सामान्यता यह हलचल एवं गतिविधियों वाले स्थानों से दूर रहते हैं यदि इन्हें छेड़ा ना जाए तो यह मनुष्य को नहीं काटते हैं । 
●सांप के जहर से ऊतक नष्ट होते हैं, नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकता है ब्लड प्रेशर एवं हृदय पर असर अथवा क्लॉटिंग एवं रक्त स्त्राव होता है । 
●लक्षण उत्पन्न होने में कभी-कभी 6 से 12 घंटे का समय लग सकता है।
● बिना जहर वाले सांप के काटे हुए स्थान पर थोड़ा दर्द और सूजन हो सकती है जो सामान्यत आसानी से ठीक हो जाती है । ●जहरीले सांप के काटने पर यदि सांप द्वारा जहर नही उगला गया है तो खतरा नहीं होता है। यदि जहर उगला गया है तब काटने की स्थान पर तेज दर्द छाला पड़ना , सूजन, लालिमा, नीलापन, रक्त स्त्राव, कालापन होना हो सकता है । 
●सांप के जहर के असर से व्यक्ति के कांटे वाले भाग के पूरे अंग में तेज दर्द हो सकता है कम ब्लड प्रेशर, कमजोर नाड़ी, बढ़ी धड़कन, उल्टी एवं जीमालिश करना, दस्त, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, देखने में दिक्कत, हाथ पैर ठंडा होना, सुन्न पड़ना, पसीना आना इत्यादि हो सकते हैं ।

सांप के काटने पर "क्या करें, क्या न करें"
● सर्पदंश के मौसम में बाहर निकलते समय बूट, मोटे कपड़े का पैंट इत्यादि पहने नशा न करें क्योंकि इससे खतरे को समझने की क्षमता कम होती है ।
●सांप दिखने पर पास न जाये एवं न ही उसे मारने की कोशिश करे, उसे बचकर जाने दे । हलचल एवं कम्पन्न इत्यादि से सांप दूर भागते है ।
● सर्पदंश पर घबराये नही, आराम से लेट जाएं , काटे हुए भाग को हृदय के स्तर से थोड़ा नीचे रखे , कपड़े ढीले कर दे, चूड़ी, कड़े, घड़ी, अंगूठी जैसे आभूषण निकाल दे ।
● छोटे बच्चे, वृद्ध और अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों ने जहर का असर गंभीर हो सकता है , इनमें विशेष ध्यान दे, इनके उपचार में देरी न करें ।
●घाव के साथ छेड़छाड़ न करें ।
●घाव को काटने , चुसनव , बर्फ लगाने, कसकर बंधने, देशी दवा अथवा केमिकल इत्यादि लगाने का कोई स्पष्ट लाभ नही होता है अपितू घाव में नुकसान हो सकता है एवं जहर शरीर मे ज्यादा तेजी से फैल सकता है ।
● घबराने , दौड़ने भागने इत्यादि से जहर तेजी से फैलता है।
●व्यक्ति को मदिरा , नशे की कोई चीज तथा कैफीनेटेड ड्रिंक्स न दे, दर्द के लिए सिर्फ पैरासीटामोल दे ।
●झाड़ फूक इत्यादि से बचे ।
●रोगी को शीघ्र जिला अस्पताल/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो अस्पताल ले जाये एवं चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार ले ।