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सरकारों की तीसरी पीढ़ी समाप्त होने को आई फिर भी यमुना पुल है अधूरा
August 27, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश
विकास का वादा करने वाली सरकारों ने आम लोगों के साथ किया है धोखा

रिपोर्ट=नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब

एक नहीं दो नहीं बल्कि तीसरी सरकार को झेल रहे औगासी यमुना पुल अभी भी अधूरे पन से जूझ रहा है। यूं कहें कि यमुना पुल अभी पूर्ण निर्मित नहीं हो सका है। जान जोखिम में डालकर लोग एक जनपद से दूसरे जनपद आ जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि पुल का निर्माण राजनेताओं से चोरी-छिपे करवाया जा रहा हो,तभी तो यमुना नदी में बना अधूरा पुल इन नेताओं को दिखाई नहीं दे रहा।
यमुना नदी के औगासी घाट में पुल का निर्माण बहुजन समाज पार्टी की जब सरकार प्रदेश में थी तब शुरू हुआ था। जो सरकार के रहते पूरा नहीं हो सका। बसपा सरकार के जाने के बाद प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी लेकिन इस सरकार ने भी अपने शासनकाल में यमुना नदी में बनने वाले पुल को पूरा नहीं करा सकी। सपा सरकार बदली और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का राज हो गया। यहां के लोगों के बीच एक नई उम्मीद पुल के निर्माण को लेकर जागी। लेकिन इन लोगों की उम्मीदों पर राजनेताओं ने पानी फेर दिया।तीन साल भाजपा सरकार के समाप्त हो जाने के बाद औगासी यमुना पुल पूरा नहीं किया जा सका। ऐसा लगता है कि औगासी घाट पर आधा अधूरा पुल प्रदेश के नक्शे से ही गायब हो गया हो,तभी तो ना तो प्रशासनिक अधिकारी इसे देखने आते हैं और न ही सरकार के नुमाइंदों ने ध्यान दिया।

        औगासी यमुना पुल फतेहपुर और बांदा जनपद को सीधे जोड़ता है। यह पुल चित्रकूट से लेकर मध्य प्रदेश सतना जाने वालों के लिए भी एक आसान और कम समय से पूरा करने वाला रास्ता है। फिर भी आधे अधूरे यमुना नदी में बने इस पुल की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। मजबूरी में लोग बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करते हैं *"मरता क्या न करता"* वाली स्थिति इन लोगों के बीच दिखाई देती है। अब तक करोड़ों रुपए सरकारों का खर्च हो चुका है फिर भी आम जनता की जरूरतों को देखते हुए पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। कई वर्षों से अधूरे पुल के निर्माण की उम्मीद भी अब धीरे-धीरे यहां के लोगों के बीच से समाप्त हो चुकी है।

 प्रदेश में जो भी सरकार सत्ता में आती है वह विकास का वादा कर के आती है अचानक विकास से मुंह मोड़ लेने पर इन्हें  अवसरवादी ना कहें तो फिर और क्या कहे। सवाल राजनेताओं से ही है वादा कर के भूल जाने की आदत बंद करें,वरना जनता भी इन्हें भुलाने में पीछे नहीं रहेगी।