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सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी लेने वाले विभाग की हो जांच
September 23, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

गांव के लिए रवाना होने वाले सफाई कर्मी आखिर कहां हो जाते हैं गायब

फतेहपुर।सफाई कर्मियों का गांव में ना मिलना। सफाई व्यवस्था को सुनिश्चित ना करना क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए। आखिर गांव के लिए रवाना सफाई कर्मी बीच में कहां गायब हो जाते हैं। यह प्रश्न बार-बार उठ रहे हैं और पंचायती राज विभाग से लेकर खंड विकास कार्यालय पर आरोप भी लगे हैं। जिन विभागों के पास इन सफाई कर्मियों की लगाम है ऐसे विभागों की क्या जांच नहीं होनी चाहिए।
        *मायावती सरकार* में गांव की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सफाई कर्मियों की भारी पैमाने पर नियुक्ति की गई थी। सफाई कर्मियों की नियुक्ति के बाद जनसंख्या के आधार पर गांव में सफाई कर्मियों को सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह व्यवस्था अभी भी चली आ रही है। लेकिन अब दो विभागों के बीच सफाई कर्मी फसे नजर आ रहे हैं। ऐसा लगता है कि सफाई कर्मी इन्हीं दोनों विभागो के बीच ही अपनी नौकरी को पूरा कर रहे है। तभी तो गांव के लिए रवाना हुआ कर्मचारी बीच में ही गायब हो जाता है यानी कर्मचारी का घोटाला हो जाता है।
    *जनपद में 840 ग्राम सभाएं हैं।* ग्राम सभाओं की सफाई की जिम्मेदारी 131 सफाई कर्मियों को सौंपी गई है। अब सवाल उठता है कि क्या यह सफाई कर्मी गांव की सफाई व्यवस्था को संभाल रहे हैं या नहीं तो जवाब यही मिलता है कि गांव में तैनात सफाई कर्मी आते ही नहीं और कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां सफाई कर्मी दिखाई भी नहीं देते। वीआईपी गांव की क्या बात करें इन गांव से सफाई कर्मियों का गायब रहना सफाई व्यवस्था को हमेशा ठेंगा दिखाता है। जब वीआईपी गांव का यह हाल है तो फिर अन्य गांव की क्या स्थिति होगी इसकाअंदाजा अपने आप ही लग जाता है।
        *सफाई कर्मियों* का गांव में ना होना और आए दिन गायब रहने को लेकर जब अंदर घुस कर जानकारी ली गई तो मालूम हुआ कि सफाई कर्मी सरकारी कागजों में गांव के लिए रवाना तो होता है लेकिन पंचायती राज विभाग व खंड विकास कार्यालय की मेहरबानी से उसे किसी दूसरे काम में लगा दिया जाता है।कर्मचारी या तो वरिष्ठ अधिकारियों के बंगले में या फिर निजी वाहन का चालक बन जाता है। जिस तरह 32 दांतो के बीच में जीभ रहती है वैसे ही ग्राम प्रधान भी इन अधिकारियों के बीच में फसने के बाद कुछ भी बोल नहीं पाता यदि बोला भी तो उसकी जांच होनी शुरू हो जाती है। जिसका मतलब यही हुआ कि सफाई कर्मियों की जानकारी लेना स्वयं आफत मोल लेना ही है।
सवाल पूछेंगे के कॉलम में हमने कई बार सफाई कर्मियों के हो रहे घोटाले के बारे में लिखा है आज फिर सवाल जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से है कि क्या सफाई कर्मियों के हो रहे घोटाले पर जांच नहीं होनी चाहिए। जिन गाँव के लिए सफाई कर्मियों का स्थानांतरण किया जाता है वहां सफाई कर्मी क्यों नहीं पहुंच पा रहे। ऐसे अधिकारियों को भी जांच के घेरे में लाना नहीं चाहिए, जिन्होंने सफाई कर्मियों का घोटाला कर उनसे सफाई व्यवस्था सुनिश्चित ना करा कर जिला व ब्लॉक मुख्यालय के आला अधिकारियों के यहां लगा रखा है।