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समय के साथ बदलता गया एयरफोर्स का काफिला, राफेल से और बढ़ी मजबूती
October 7, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली, आजादी के बाद से ही देश की वायुसेना को एडवांस करने का सिलसिला जारी है। यही कारण है कि देश की वायुसेना आज दुनिया के टॉप 5 देशों की वायुसेना में शामिल है। 8 अक्टूबर, 1932 को भारतीय वायुसेना का गठन किया गया था। उसके बाद इंडियन एयरफोर्स के वायुयान ने अपनी पहली उड़ान 1 अप्रैल, 1933 को भरी थी।

उस समय इसमें RAF द्वारा प्रशिक्षित 6 अफसर और 19 हवाई सिपाही इसमें शामिल थे। उसके बाद से दिनोंदिन वायुसेना को मजबूत करने के लिए काम किया जा रहा है। 1953 में ही वायुसेना के लिए फ्रांस के चर्चित टूफानिस लड़ाकू जेट (Toufanis Fighter Jet) को खरीदा गया था। साल 2002 के बाद अब वायुसेना के बेड़े में राफेल को शामिल किया गया है। वायुसेना के बेड़े में शामिल कुछ खास-खास विमानों की खासियत के बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं। तंजावुर एयरबेस पर सुखोई का फाइटर एयरक्राफ्ट SU-30 MKI तैनात है। यह दक्षिण भारत में पहला एसयू- 30 एमकेआई लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन है जो समुद्र में भी अहम भूमिका निभाता है। SU-30 MKI में ब्रह्मोस सुपर सोनिक मिसाइलों को भी लगाया गया जो 300 किमी दूरी तक निशाना साध सकता है। यह फाइटर एयरक्राफ्ट अपने साथ 2.5 टन के वजन वाला सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को अपने साथ रखने में सक्षम है। चौथी पीढ़ी का यह सुखोई 12वां स्क्वाड्रन है। वायुसेना को 1985 में अपना पहला मिग -29 मिला था और आधुनिकीकरण के बाद मिग -29 की लड़ाकू क्षमता में बढ़ोतरी हो गई। आधुनिकीकरण के बाद मिग-29 एक तरह से चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में शुमार हो गया। यह रूस के साथ-साथ विदेशी हथियारों को ले जाने में सक्षम है। बेहद तेज गति के बीच भी यह एरियल टारगेट को ट्रैक कर पाता है।