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समारोह में अलीमुद्दीन ने बताया कैसे वह PM मोदी को मान बैठा था गलत, लेकिन फिर हुआ उनके सही होने का एहसास
November 22, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

समारोह में अलीमुद्दीन ने बताया कैसे वह PM मोदी को मान बैठा था गलत, लेकिन फिर हुआ उनके सही होने का एहसास

(न्यूज़)।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज गुजरात के गांधीनगर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. इसी विश्वविद्यालय के एक पुराने छात्र ने प्रधानमंत्री का स्वागत अपने साथ उनकी मुलाकातों का जिक्र करके किया. छात्र का नाम सुल्तान अलीमुद्दीन है. अलीमुद्दीन उसी यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जहां प्रधानमंत्री ने आज छात्रों को संबोधित किया.
अलीमुद्दीन ने अपनी और पीएम मोदी की मुलाकात का जिक्र करते हुए लिखा- आज मेरे यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह है, जहां पीएम नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि हैं. पीडीपीयू के सबसे पुराने पूर्व छात्रों में से एक के रूप में मेरे पास बहुत सारी यादे हैं. मैंने मोदी सर के साथ कई मीटिंग्स की हैं. एक बार मैंने उन्हें पवित्र कुरान भी भेंट की थी.
माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर एक के एक सिलेसिलेवार ट्वीट्स करते हुए अलीमुद्दीन ने लिखा, नरेंद्र मोदी सर के साथ मेरी पहली बातचीत संयोग से हुई, जब मैंने उन्हें उनकी सरकार के कामकाज पर एक ट्वीट किया और मुझे सीएमओ, गुजरात में एक विस्तृत बैठक के लिए आमंत्रित किया गया. उनके साथ मेरी 6 मुलाकातों में से वह पहली थी. इसमें उनके साथ मेहसाणा जाना भी शामिल है.
PDPU के पूर्व छात्र अलीमुद्दीन ने लिखा- मैं पीडीपीयू में पढ़ने के लिए साल 2008 में गुजरात आया था. उस समय मैं गुजरात आने के विचार से खुश नहीं था. मेरे दिमाग में गुजरात का मतलब दंगे और भूकंप थे. मेरे दोस्तों ने मुझे गुजरात से दूर रखने के लिए कहा था, लेकिन मोदी सर के साथ बातचीत और राज्य ने मेरी धारणा और मानसिकता बदलने में मदद की. अलीमुद्दीन ने ट्वीट किया, मार्च 2010 के आसपास के अखबार एसआईटी जांच से जुड़ी खबरों से भरे रहते थे, जिसने मुझे नरेंद्र मोदी सर से खुद ही सटीक सच्चाई जानने की ओर आकर्षित किया और 1 अप्रैल को 2010 को उनसे मेरी पहली मुलाकात हुई.
प्रधानमंत्री मोदी पर एक किताब लिख चुके अलीमुद्दीन ने ट्वीट किया, मोदी सर ने अपनी एक बैठक में मुझे जो बताया वह मैं कभी नहीं भूलूंगा. उन्होंने कहा, मैंने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया है. लेकिन यह ध्यान दें कि मैंने हिंदुओं, जैन, सिखों के लिए भी कुछ नहीं किया है. मैं 5.5 करोड़ गुजरातियों के लिए जिम्मेदार हूं और मैं जो कुछ भी करता हूं, उनके लिए करता हूं.प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज गुजरात के गांधीनगर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. इसी विश्वविद्यालय के एक पुराने छात्र ने प्रधानमंत्री का स्वागत अपने साथ उनकी मुलाकातों का जिक्र करके किया. छात्र का नाम सुल्तान अलीमुद्दीन है. अलीमुद्दीन उसी यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जहां प्रधानमंत्री ने आज छात्रों को संबोधित किया.
अलीमुद्दीन ने अपनी और पीएम मोदी की मुलाकात का जिक्र करते हुए लिखा- आज मेरे यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह है, जहां पीएम नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि हैं. पीडीपीयू के सबसे पुराने पूर्व छात्रों में से एक के रूप में मेरे पास बहुत सारी यादे हैं. मैंने मोदी सर के साथ कई मीटिंग्स की हैं. एक बार मैंने उन्हें पवित्र कुरान भी भेंट की थी.
माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर एक के एक सिलेसिलेवार ट्वीट्स करते हुए अलीमुद्दीन ने लिखा, नरेंद्र मोदी सर के साथ मेरी पहली बातचीत संयोग से हुई, जब मैंने उन्हें उनकी सरकार के कामकाज पर एक ट्वीट किया और मुझे सीएमओ, गुजरात में एक विस्तृत बैठक के लिए आमंत्रित किया गया. उनके साथ मेरी 6 मुलाकातों में से वह पहली थी. इसमें उनके साथ मेहसाणा जाना भी शामिल है.
PDPU के पूर्व छात्र अलीमुद्दीन ने लिखा- मैं पीडीपीयू में पढ़ने के लिए साल 2008 में गुजरात आया था. उस समय मैं गुजरात आने के विचार से खुश नहीं था. मेरे दिमाग में गुजरात का मतलब दंगे और भूकंप थे. मेरे दोस्तों ने मुझे गुजरात से दूर रखने के लिए कहा था, लेकिन मोदी सर के साथ बातचीत और राज्य ने मेरी धारणा और मानसिकता बदलने में मदद की. अलीमुद्दीन ने ट्वीट किया, मार्च 2010 के आसपास के अखबार एसआईटी जांच से जुड़ी खबरों से भरे रहते थे, जिसने मुझे नरेंद्र मोदी सर से खुद ही सटीक सच्चाई जानने की ओर आकर्षित किया और 1 अप्रैल को 2010 को उनसे मेरी पहली मुलाकात हुई.
प्रधानमंत्री मोदी पर एक किताब लिख चुके अलीमुद्दीन ने ट्वीट किया, मोदी सर ने अपनी एक बैठक में मुझे जो बताया वह मैं कभी नहीं भूलूंगा. उन्होंने कहा, मैंने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया है. लेकिन यह ध्यान दें कि मैंने हिंदुओं, जैन, सिखों के लिए भी कुछ नहीं किया है. मैं 5.5 करोड़ गुजरातियों के लिए जिम्मेदार हूं और मैं जो कुछ भी करता हूं, उनके लिए करता हूं।