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राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कोरोना से रख रहे खुद को सुरक्षित, खा रहे कंद-मूल व जड़ी-बूटी
September 16, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

बिलासपुर। कोरोना संक्रमण को लेकर देश के साथ ही प्रदेश में भयावह स्थिति है। संक्रमितों के साथ ही मृतकों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। महामारी के इस दौर में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ वनांचल में रहने वाले बैगा अपने आपको पूरी तरह सुरक्षित रखे हुए हैं। वे कंद-मूल और जड़ी-बूटी खा रहे हैं। इस जिले में 16 ऐसे गांव हैं जहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगाओं की संख्या अधिक है

चिकित्सा रिपोर्ट में भी अब तक इन गांवों से एक भी व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है। कोरोना संक्रमण काल में बैगाओं ने सरकारी दिशा निर्देशों से अलग अपनी खुद की व्यवस्था कर रखी है। शहरी इलाकों में प्रशासनिक कड़ाई के बावजूद लोगों की मनमानी चल रही है। बैगाओं के गांव में न तो प्रशासन की पहुंच है और न ही प्रशासनिक कड़ाई।बैगा गांव में किसी को न तो आने दे रहे हैं और न ही खुद गांव से बाहर जा रहे हैं। गांव के बाहर रास्ते में कांटों की बाड़ लगा दी गई है। सुबह जरूरी कार्य से लेकर स्नान तक के लिए अलग-अलग समय तय कर दिया गया है। एक मोहल्ले के लोग सुबह पांच बजे स्नान करने तालाब जाएंगे तो दूसरे मोहल्ले के लोग सुबह छह बजे। उनका यह अनुशासन ही उन्हें कोरोना जैसी महामारी से भी अब तक सुरक्षित रखे है। स्वास्थ्य विभाग की टीम बैगाओं के गांवों में निगरानी कर रहीं हैं। मितानिनों की ड्यूटी लगाई गई है।

16 गांव में छह हजार बैगा

मरवाही व कोटा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम करंगरा, धनौली, बेड़खोदरा, चुक्तिपानी, साल्हेघोरी, पंडरी पानी, दही बहरा, अंधियारखोर, बानघाट, पीढ़ा, केंवची, आमाडोब, पड़वाइन, पकरिया व पीपरखूंटी में तकरीबन छह हजार बैगा निवास करते हैं। खास बात ये कि 23 मार्च से लेकर अब तक बैगाओं ने आसपास के ग्रामीण इलाकों के अलावा शहर से संपर्क पूरी तरह तोड़ दिया है। जीविकोपार्जन का मुख्य आधार वनोपज है।