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राममंदिर में बनेंगे चार प्रवेश द्वार, संग्रहालय में होगा 500 वर्षों के संघर्ष का इतिहास  
August 19, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


 
अयोध्या । पांच अगस्त को हुए भूमि पूजन के बाद रामनगरी में दिव्य-अलौकिक राममंदिर निर्माण की परिकल्पना भी अब मूर्त रूप लेने लगी है। दूसरी तरफ ट्रस्ट की मंशा है कि राममंदिर परिसर रामायण कालीन दिखना चाहिए। इसके लिए कुछ ऐसी योजनाएं बनी हैं, जिनसे मंदिर परिसर पहुंचते ही रामभक्तों के जेहन में त्रेतायुग जीवंत होता प्रतीत होगा। श्रीराममंदिर में चार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे जिन्हें गोपुरम के नाम से जाना जाएगा। इसके अतिरिक्त रामकथा कुंज, राम म्यूजियम सहित श्रीराम के जीवन पर शोध के लिए शोध संस्थान व गुरुकुल की भी स्थापना होगी।
राममंदिर को विश्व का सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की योजना है। रामजन्मभूमि परिसर को कुछ इस तरह विकसित किया जाएगा कि प्रवेश करते ही श्रद्धालु व भक्तों को रामायणकालीन समय का अहसास होने लगे। रामकथा कुंज में भगवान राम के जीवन प्रसंगों को दर्शाती 125 मूर्तियां स्थापित की जाएंगी, जो पूरी रामायण को दर्शाती नजर आएंगी। राममंदिर तक श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकें इसके लिए हाईवे से राममंदिर परिसर तक चार कॉरिडोर भी बनेंगे। यह कॉरिडोर फोरलेन की शक्ल में रामायणकालीन दृश्यों से सुसज्जित होंगे। परिसर की चारों दिशाओं में कुल चार प्रवेश द्वार होंगे जिन्हें गोपुरम के नाम से जाना जाएगा। 
दो मुख्य द्वार और दो आपात द्वार होंगे। परिसर के मंदिर से अलग झांकी के माध्यम से राममंदिर के लिए 500 वर्षों तक हुए संघर्ष का इतिहास भी म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी को राममंदिर आंदोलन की पूरी जानकारी हो सके। इसके अलावा ट्रस्ट ने परिसर स्थित 11 प्राचीन स्थलों का भी सर्वे किया है, सर्वे में यहां राम युग के साक्ष्य मिले हैं। इनका भी सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। रामलला के परिसर में जो भी काम होगा वह गुणवत्तापूर्ण होगा। राम जन्म भूमि परिसर के अंदर गुरुकुल की स्थापना होगी, जिससे बड़े पैमाने पर वेद पाठी बालक रामसंस्कृति व रामायण की शिक्षा ले सकें। भगवान राम पर शोध करने के लिए शोध संस्थान की स्थापना सहित, प्रसाद स्थल, धर्मशाला, भजन स्थल, कथा मंडप सहित कई योजनाएं भी हैं।
 *मंदिर परिसर में लगेंगे 27 नक्षत्रों के पेड़* 
राम मंदिर परिसर में नक्षत्र वाटिका भी होगी। 27 नक्षत्रों के लिए 27 पेड़ लगाए जाएंगे। ज्योतिष के लिहाज से नक्षत्र वाटिका की स्थापना बेहद शुभ मानी जाती है। राम मंदिर परिसर हराभरा होगा। पूरे 70 एकड़ भूमि में हरियाली का खास ध्यान रखा जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नक्षत्र वाटिका में एक-एक पेड़ लगाए जा चुके हैं। इस वाटिका में कुचला (अश्विनी), आंवला (भरणि), गूलर (कृतिका), जामुन (रोहिणी), खैर ( मृगशिरा), शीशम (आर्द्रा), बांस (पुनर्वसु), पीपल (पुष्य), नागकेसर (आश्लेषा), बरगद (मघा), पलाश (पूर्वा फाल्गुनी), पाकड़ (उत्तरा फाल्गुनी), रीठा (हस्त), बेल (चित्रा), अर्जुन (स्वाति), विकंकत (बिसाखा), मौलश्री (अनुराधा), चीड़ (ज्येष्ठा), साल (मूल), जलवेतस (पूर्वाषाढ़ा), कटहल (उत्तरासाढ़ा), मदार (श्रवण), शमी (धनिष्ठा), कदंब (शतभिषक), आम (पूर्वा भाद्रपद), नीम (उत्तरा भाद्रपद), महुआ (रेवती) के पेड़ लगाए जाएंगे।
 *नवग्रह, पंचवटी, हरिशंकरी वाटिका से भी बढ़ेगी भव्यता* 
राम मंदिर परिसर में नवग्रह वाटिका भी बनाई जाएगी। ग्रह-नक्षत्रों को अनुकूल बनाने वाले पौधों की वाटिका पर काम भी शुरू हो गया है। प्रभागीय वनाधिकारी मनोज खरे ने बताया कि परिसर में नवग्रह वाटिका की स्थापना के क्रम में एक माह के भीतर 100 से अधिक पौधे रोपे गए हैं। परिसर में पंचवटी भी स्थापित की जाएगी। आंवला, बेल, बरगद, पीपल और अशोक के समूह को पंचवटी कहते हैं। इसे पंचभूतों से भी जोड़कर देखा जाता है। स्कंद पुराण में इसका वर्णन मिलता है। भगवान विष्णु व शंकर को प्रिय हरिशंकरी वाटिका भी परिसर की शोभा बनेगी। इसके तहत पीपल, पाकड़ और बरगद इस प्रकार रोपित किए जाते हैं कि तीनों का संयुक्त छत्र विकसित हो।