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राज्यों की ओर से जांच की सहमति वापस लिए जाने से CBI में बेचैनी, कानून बदलने की जरूरत बता रहे अधिकारी
October 26, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली। एक-एक करके राज्यों की ओर से सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) के वापस लेने से सीबीआइ में बेचैनी बढ़ गई है। सीबीआइ के अधिकारियों का कहना है कि इससे केंद्रीय जांच एजेंसी का कामकाज बुरी तरह प्रभावित होगा और साथ ही अपराधियों को सजा दिलाने में उसकी मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी। सीबीआइ की साख कायम रखने के लिए अधिकारी दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैबलिस्मेंट (डीपीएसई) एक्ट में तत्काल संशोधन की जरूरत बता रहे हैं।

एक एक करके सहमति वापस ले रहे राज्‍य

बीते दिनों महाराष्ट्र सरकार ने सीबीआइ को दी गई सामान्य सहमति वापस ले लिया था। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और राजस्थान पहले ही इसे वापस ले चुके हैं और केरल ने भी वापस लेने का संकेत दिया है। इस मसले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीआइ का कोई भी अधिकारी आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है लेकिन व्यक्तिगत बातचीत में उनकी चिंता साफ झलकती है।

जल्‍द उठाने होंगे कदम

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मौजूदा समय में अपराध किसी राज्य और देश की सीमा तक सीमित नहीं रह गया है। इसके तार दूर-दूर तक फैले होते हैं। किसी दूसरे देश में जांच के लिए सीबीआइ को इंटरपोल या फिर कूटनीतिक चैनल से लेटर रोगेटरी के माध्यम से सबूत जुटाने पड़ते हैं। अधिकारी ने कहा कि यदि जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो सीबीआइ को जांच के लिए देश के भीतर भी इसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।

अब तो अदालतों का ही भरोसा

सीबीआइ के लिए राहत की बात केवल इतनी है यदि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट आदेश दे दें तो फिर सामान्य सहमति की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीबीआइ की अभियोजन इकाई (प्रोसीक्यूशन विंग) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार समस्या सीबीआइ के गठन के लिए बनाए गए डीएसपीई एक्ट में है। इस एक्ट के तहत सीबीआइ को एक केंद्रीय पुलिस बल रूप में मान्यता है और कानून व्यवस्था राज्य का विषय होने के कारण राज्यों में जांच का उसका अधिकार सीमित हो जाता है।