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राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी की याचिका लंबित होने पर कोर्ट नाराज
November 3, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली,  उच्चतम न्यायालय ने राजीव गांधी हत्याकांड के एक मुजरिम की सजा माफी की याचिका तमिलनाडु के राज्यपाल के पास दो साल से भी ज्यादा समय से लंबित होने पर मंगलवार को नाराजगी व्यक्त की। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता एजी पेरारिवलन के वकील से जानना चाहा कि क्या न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अपने अधिकार का इस्तेमाल कर राज्यपाल से निर्णय करने का अनुरोध सकता है? इस समय उम्र कैद की सजा काट रहे पेरारिवलन ने अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के पास यह याचिका दायर की थी।

इस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को किसी आपराधिक मामले में क्षमा देने का अधिकार प्राप्त है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, हेमंत गुप्ता और अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा, हम इस समय अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं। लेकिन, हम इस बात से खुश नहीं है कि तमिलनाडु सरकार की सिफारिश दो साल से लंबित है। न्यायालय पेरारिवलन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने अपनी उम्र कैद की सजा सीबीआइ के नेतृत्व में कई एजेंसियों की जांच पूरी होने तक निलंबित रखने का अनुरोध किया है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने पेरारिवलन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से कहा, राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की मदद और सलाह से काम करना है। लेकिन, अगर राज्यपाल आदेश पारित नहीं करें तो आप हमें बताएं कि न्यायालय क्या कर सकता है? पीठ ने शंकरनारायणन से कहा कि वह इस तथ्य से अवगत कराएं कि किस तरह से वह राज्यपाल से फैसला लेने का अनुरोध कर सकती है और इस संबंध में कानून क्या कहता है? शीर्ष अदालत ने इसके बाद तमिलनाडु की ओर से पेश अधिवक्ता बालाजी श्रीनिवासन से जानना चाहा कि राज्य सरकार न्यायालय के किसी आदेश के बगैर ही राज्यपाल से फैसला लेने का अनुरोध क्यों नहीं कर सकती?

श्रीनिवासन ने कहा कि राज्यपाल ने जांच एजेंसियों की रिपोर्ट मांगी है। इस पर पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से सवाल किया कि क्या राज्य सरकार ने जांच एजेंसियों की रिपोर्ट भेजने के लिए कोई अनुरोध किया है। नटराज ने कहा कि इस हत्याकांड में व्यापक साजिश की जांच अभी चल रही है। यह जांच ब्रिटेन और श्रीलंका सहित कई देशों में फैली है।