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पुलिस व वन विभाग की सांठगांठ से जिले में उजाडे जा रहे बाग के बाग
August 12, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

रात के अंधेरे में हरे पेड़ों पर चलते आरे व कुल्हाड़े!
 
पीपल बाबा के फार्मूले को अपना प्रशासन लाएगा जिले में हरियाली

रोपित पौधों को बचाने के लिए डीएम ने निकाली तरकीब, गांव से लेकर ब्लॉक व जिले के अधिकारियों कर्मचारियों की तय होगी जवाबदेही

हरे पेड़ों को काटने की छूट देने व उस ओर न जाने को थाना व वन विभाग को हर पेड़ की दर से मिलती है चौथ
फतेहपुर जिले में हरे पेड़ों की कटान वन विभाग व पुलिस की सांठगांठ से लंबे समय से होती आ रही है। लाख प्रयासों के बावजूद पेड़ों की कटान पर रोक नहीं लग पा रही है। एक ओर शासन-प्रशासन हर साल नए पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित करता है और उसी के तहत लाखों की तादाद में पौधे रोपित किए जाते हैं। दूसरी ओर हरियाली के दुश्मन पेड़ों पर दिन रात आरे कुल्हाडे चटकाते रहते हैं। पेड़ों की कटान का ही नतीजा है कि दूर-दराज के गांवों में कोयले की भट्ठियां अभी भी धधक रही है। *इस ओर न तो पुलिस का ध्यान जा रहा है और ना ही वन विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है। आंख फेरने के बदले इन्हें संचालकों द्वारा मोटी रकमें दी जा रही हैं।
जिले में साल दर साल पौधरोपण तो होता है लेकिन जितनी तादाद में पौधे रोपित किए जाते हैं उसके सापेक्ष हरियाली कहीं दिखाई नहीं पड़ती। जनपद के 13 विकास खंडों की 840 ग्राम पंचायतों से गठित जिले में शहरी व ग्रामीण इलाके की आबादी 29 लाख के पार है। हर साल की तरह इस वर्ष भी 35 लाख के करीब पौध रोपित किए गए। रोपित किए गए इन पेड़ों को बचाने के लिए जिलाधिकारी संजीव सिंह ने नई कवायद शुरू की है। ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर पर कर्मचारियों व अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है कि जो पेड़ लगाए जाएंगे उन्हें पाल पोस कर बड़ा भी करना है। केवल पौधे लगाकर कागजी खानापूरी नहीं की जानी है। इतना ही नहीं जिलाधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद् पीपल बाबा से भी पौधों को बचाने के लिए कई चरणों में वार्ता की है।पीपल बाबा जनपद आकर यहां की मिट्टी व भौगोलिक स्थिति का आकलन कर अपना मार्गदर्शन दे चुके हैं। जिलाधिकारी संजीव सिंह ने ग्राम पंचायतों की अवैध कब्जों से मुक्त होकर खाली हो रहीं सरकारी जमीनों पर क्लस्टर रूप में बरगद, पीपल, सहजन, पाकर आदि के पौधे रोपित किए जाने की योजना बनाई है। सब ठीक-ठाक रहा तो पीपल बाबा के फार्मूले को अपनाकर जिले को हरा-भरा किया जाएगा।इसकी जिलाधिकारी ने पूरी कार्ययोजना बना ली है और अंतिम दौर की वार्ता व कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाना है।
अब तक जिले में हरियाली के रखवाले ही मनमानी करते आए हैं पेड़ कटान के मामले में हथगांव, हुसैनगंज,सुल्तानपुर घोष, जाफरगंज, जहानाबाद, चांदपुर,गाजीपुर, मलवा, ललौली, सहित एक दर्जन के करीब थाना क्षेत्र ऐसे रहे हैं जहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान सदा से होती आ रही है।बड़ा खेल खेलने के लिए विभाग के अधिकारी भी पूरी सहभागिता निभाते रहे हैं और इसी का नतीजा रहा कि बिना प्रतिबंध वाले पेड़ों को काटने के लिए एक दो पेड़ों की अनुमति लेने के बाद लकड़ी के ठेकेदारों ने बाग के बाग उजाड़ दिए और इसके लिए थाना पुलिस को हर पेड़ के हिसाब से पैसा दिया जाता रहा है।शिकवा शिकायत होने पर जांच कागजों तक में सिमट कर रह गई। नतीजतन हरियाली के रखवाले तमाशा देखते रहे। पर्यावरण असंतुलन एवं बे मौसम हो रही बरसात, जाड़ा, गर्मी अंधाधुंध पेड़ों की कटान का ही नतीजा है। पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पौधे रोपित करने होंगे और इसके लिए आम जनता को भी आगे आना होगा। पौध रोपित करने से ज्यादा उनके संरक्षण व पालन पोषण की आवश्यकता है। जिससे रोपे जाने वाले पौधों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में बचाया जा सके। जिला प्रशासन को भी कड़े कदम उठाने होंगे और पेड़ों की कटान करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई कर उन्हें जेल की सलाखों तक भेजना होगा और तो और पुलिस प्रशासन के जिम्मेदारों को भी इस ओर ठोस कदम उठाने होंगे। *थाना पुलिस की सांठगांठ से होने वाले पेड़ कटान को रोकने के लिए कार्ययोजना बनाकर आगे बढ़ना होगा और दोषियों पर कार्रवाई करनी होगी तभी हरियाली को बचाया जा सकेगा।