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फर्जी वसीयत में शामिल सीना तान कर घूमने वाले सरकारी लोगो पर कब होगी कार्रवाई 
October 12, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

फर्जी वसीयत में शामिल सीना तान कर घूमने वाले सरकारी लोगो पर कब होगी कार्रवाई 

एफ आई आर करने से क्यों बच रहे हैं आला अधिकारी

फतेहपुर।सावित्री देवी की बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए जो घिनौना खेल खेला गया उसे लेकर अभी भी खेल में शामिल खागा तहसील के अधिकारियों को बचाने की पूरी कोशिश जारी है। जबकि फर्जी वसीयत की पटकथा लिखने वाले और पटकथा के अनुसार अपना अपना किरदार निभाने वालों की धुंधली तस्वीर साफ हो चुकी है।फिर भी एक लेखपाल पर निलंबन जैसी कार्यवाही कर पूरी पटकथा को समाप्त करना मतलब अधिकारियों को बचाने की कोशिश करना ही है।
हम बराबर 2 दिनो से खागा तहसील में भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा की गई करतूत की कहानी को उजागर कर रहे हैं जिसमें फर्जी वसीयत के जरिए करोड़ों रुपए की जमीन को हथियाने का प्रयास किया गया था लेकिन जब यह मामला जिला मुख्यालय में बैठने वाले अधिकारियों तक पहुंचा तो सभी के कान खड़े हो गए और आनन-फानन में बेचारे क्षेत्रीय लेखपाल को निलंबित कर दिया गया। पुनः फिर उसी महिला के नाम जमीन कर दी गई लेकिन सवाल इस बात के लिए उठने शुरू हो गए की फर्जी वसीयत केवल लेखपाल की बस की बात नहीं थी,इसमें खागा तहसील के कई अधिकारी शामिल थे। क्योंकि जमीन बेशकीमती थी और मोलभाव भी जमीन की कीमत के अनुसार ही हुआ होगा। इस बात को तहसील के आला अधिकारी के अलावा अब जिला मुख्यालय के अधिकारी भी समझ चुके हैं लेकिन ऐसे भ्रष्ट सरकारी नुमाइंदों को विभागीय कार्रवाई से बाहर रखना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता।
जिस खागा तहसील की ज़मीन को अंग्रेजों के चंगुल से बचाने को लेकर ठाकुर दरियाव सिंह ने कुर्बानी दी थी। इस कुर्बानी की कहानी को आज भी लोग याद करते रहते हैं लेकिन खागा तहसील की जमीनों पर भू माफियाओं की लगीं नजर ज़मीन के असली वारिस को ही बदल कर रख देते है। जिन सरकारी लोगों को जमीन को बचाने की जिम्मेदारी मिली है वही लोग भू माफियाओं से मिलकर ठाकुर दरियाव सिंह की कुर्बानी को भूल चुके हैं। सावित्री देवी का मामला चल ही रहा है जबकि इससे पहले कई बीघा वन विभाग की जमीन को भी तहसील के ही तत्कालीन सरकारी नुमाइंदों को मिलाकर बेच दिया गया अब इस मामले की भी जांच शुरू है।
सवाल पूछे जा रहे हैं और पूछे जाते रहेंगे,जब तक असली गुनहगारों को विभागीय कार्रवाई के कटघरे से बाहर रखा जाएगा। कहावत है कि जब तक असली गुनहगार को सजा नहीं मिलती तब तक गुनाह बंद नहीं होते। ऐसे में जब सावित्री देवी के जीवित रहते जिन भू माफियाओं के साथ मिल कर खागा तहसील के सरकारी नुमाइंदों ने इतनी बड़ी हेराफेरी की,जो सुर्खियों में है फिर भी गुनाहगार सीना तान कर घूमेंगे तो फिर ऐसे गुनाह होते ही रहेंगे।