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फर्जी वसीयत के मामले को जिला मुख्यालय ने गंभीरता से लिया
October 13, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

फर्जी वसीयत के मामले को जिला मुख्यालय ने गंभीरता से लिया

बड़ी कार्यवाही के मिल रहे हैं संकेत

फतेहपुर।कहीं खुद को बचाने को लेकर खागा तहसील के आला अधिकारी जिला मुख्यालय में बैठने वाले अधिकारियों को गुमराह तो नहीं कर रहे।यदि गुमराह नहीं कर रहे तो अब तक फर्जी वसीयत के जरिए करोड़ों रुपए की जमीन हड़पने का मामला कोतवाली की दहलीज को पार क्यों नहीं कर सका। जबकि तहसील के सरकारी नुमाइंदों के साथ-साथ उन दो भू माफियाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना हो जाना चाहिए जिन्होंने ऐसा फर्जीवाड़ा किया था। केवल लेखपाल को बलि का बकरा बनाना कितना उचित है।
आपकी जानकारी में है ही की सावित्री देवी के नाम करीब 2 बीघा जमीन खागा कस्बे में है और इस जमीन कि कीमत करीब 2 करोड़ रुपए के लगभग है। अभी सितंबर माह का ही मामला है जब कस्बे के ही दो भू माफियाओं ने सावित्री देवी की जमीन को फर्जी वसीयत के जरिए हथिया ली लेकिन जैसे ही इस बात की जानकारी जंगल में लगी आग की तरह फैलने लगी तो इस काम को अंजाम तक पहुंचाने वाले तहसील के कर्मचारियों के होश उड़ने शुरू हो गए। सूत्रों की माने तो जिला मुख्यालय से मिली डाट के बाद आनन-फानन में फिर असली सावित्री देवी के नाम पूरी जमीन कर दी गई। और कार्रवाई के नाम पर बेचारे क्षेत्रीय लेखपाल की बलि दे दी गई। कार्रवाई के नाम पर खाना पूरी कर दी गई। लेकिन सवाल जिला मुख्यालय में बैठने वाले अधिकारियों से पूछा ही जा रहा है कि जिन लोगों ने फर्जी वसीयत के जरिए बेशकीमती जमीन को हथियाने का प्रयास किया क्या उन पर कार्रवाई नहीं बनती चाहे वह भूमाफिया हो या फिर इसफर्जीवाड़े को अंजाम तक पहुंचाने वाले सरकारी नुमाइंदे ही क्यों ना हो।
सूत्रों की माने तो जिला मुख्यालय इस मामले को गंभीरता से लिया है और शीघ्र ही बड़ी कार्रवाई के संकेत भी मिल रहे हैं। इस कार्रवाई के घेरे में भू माफिया तो आएंगे ही और उन कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है जिन्होंने आनन-फानन में फर्जी वसीयत के जरिए सावित्री देवी की जमीन को भू माफियाओं के हाथों में दे दी थी। विभागीय कार्यवाही तो होगी ही साथ ही ऐसे लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के संकेत भी मिल रहे हैं। यदि सत्ताधारी बीच में ना कूदे तो कार्रवाई बिल्कुल तय है। सवाल तो तहसील मुख्यालय में बैठने वाले आला अधिकारियों से भी पूछा जाना चाहिए कि इस फर्जी वसीयत के बाद क्या लेखपाल का निलंबन ही सही है बाकी लोग क्या गंगोत्री में नहा कर सारे पापों से मुक्त हो चुके हैं।