ALL राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य राजनीति अपराध विशेष विज्ञापन दुनिया कोविड-19 (कोरोना वायरस)
पत्रकार सिद्दीक कप्पन की रिहाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार को दिया नोटिस
November 16, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर शुक्रवार तक जवाब मांगा है। मामले पर कोर्ट शुक्रवार को फिर सुनवाई करेगा।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पत्रकार कप्पन की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली केरल यूनियन आफ वर्किग जर्नलिस्टस की याचिका पर सुनवाई के बाद दिये। जर्नलिस्ट यूनियन ने याचिका में यूनियन के सचिव सिद्दीक कप्पन को रिहा किये जाने की मांग की है। मामले पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता यूनियन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कप्पन को जमानत दिये जाने की मांग की।

सिब्बल ने कहा कि पत्रकार को गत 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था तब से वह जेल में है। वकील को उससे मिलने नहीं दिया जा रहा है। सिब्बल ने कहा कि एफआइआर में उसका कहीं नाम नहीं है न ही इस बात का जिक्र है कि उसने क्या अपराध किया है। यह एक पत्रकार है उसे जमानत मिलनी चाहिए। इन दलीलों पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह अभी याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं। वह मामले में राज्य सरकार का भी पक्ष सुनेंगे। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता याचिका की प्रति प्रदेश सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल को इस बीच दे सकते हैं मामले पर 20 नवंबर यानी शुक्रवार को फिर सुनवाई की जाएगी। शुरुआत मे मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सिब्बल से कहा कि वह हाईकोर्ट क्यों नहीं गए सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए। सिब्बल ने कहा कि कोर्ट पहले भी अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करता रहा है। उन्होंने कहा कि वह सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आते लेकिन यह एक पत्रकार की गिरफ्तारी का मामला है। वह जमानत चाहते हैं। लेकिन कोर्ट ने तत्काल कोई राहत नहीं दी और मामले मे नोटिस जारी करते हुए शुक्रवार को सुनवाई पर लगाने की बात कही।उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म और हत्या के चर्चित हाथरस कांड की कवरेज के लिए हाथरस जाते समय रास्ते में सिद्दीक कप्पन को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने कप्पन सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया था और उन पर जातीय दंगे भड़काने का आरोप लगाया है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने जनर्लिस्ट यूनियन की याचिका पर सुनवाई टालते हुए उन्हें इस बीच हाईकोर्ट जाने को कहा था।