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नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह: लखनऊ और बाराबंकी में करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक है अजय यादव
September 6, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

लखनऊ। दुर्गेश हत्याकांड के बाद जालसाजी के बड़े गिरोह का नाम सामने आने के बाद पुलिस को कई चौकाने वाली जानकारी मिली है। गिरोह के मास्टरमाइंड सचिवालय के सेक्शन अफसर अजय यादव के कारनामे सामने आने लगे हैं। आरोपित अजय न केवल दुर्गेश बल्कि उसके जैसे अन्य लोगों का भी मुखिया था।

अजय गिरोह में शामिल लोगों से खुद का नाम इस्तेमाल करवाकर बेरोजगार लोगों को झांसे में लेने के लिए कहता था। इसके बाद उनसे मोटी रकम हड़प लेता था।छानबीन में सामने आया है कि गोमतीनगर पुलिस ने 10 अक्टूबर 2019 को अयोध्या के खंडासा अमानीगंज निवासी सर्वेश यादव को गिरफ्तार किया था। सर्वेश ने खुद को सचिवालय का सेक्शन अफसर बताकर एक सेवानिवृत्त जज के यहां किराए पर कमरा लिया था। पुलिस ने जब आरोपित की गाड़ी की तलाशी ली थी तो उसमें से दर्जनों युवकों के मार्कशीट, विभिन्न विभागों में नौकरी का जॉइनिंग लेटर, लाखों रुपये के चेक व अन्य दस्तावेज बरामद हुए थे। इन सबके पीछे भी अजय यादव का नाम आया था। अजय ने ही सर्वेश को साजिश के तहत कहानी बुनने की बात कही थी और उसे एक गाड़ी मुहैया करवाई थी, जिसपर उत्तर प्रदेश शासन लिखा था और उसके ऊपर हूटर लगा था। इससे पहले की पुलिस अजय यादव तक पहुंचती, उसने अपना रसूख दिखाकर मामले को दबा दिया था। तब गोमतीनगर पुलिस भी अजय यादव के कारनामे नहीं खोल पाई थी। 
अजय यादव के पीछे सचिवालय का एक बड़ा गिरोह भी साथ था। पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि दुर्गेश व अन्य लोग अक्सर सचिवालय में अजय के साथ बैठे रहते थे। दुर्गेश खुद को सचिवालय का सचिव बताकर गेट नम्बर पांच पर जाता था और बाहरी लोगों को भीतर लाकर उन्हें अदब में लेता था। अजय की बाराबंकी और लखनऊ में करोड़ों की संपत्तियों की जानकारी पुलिस को मिली है। यही नहीं इसकी भूमिका नौकरी के नाम पर ठगी के अलावा जमीन के नाम पर धोखाधड़ी, टेंडर दिलाने के नाम पर खेल व अन्य मामलों में सामने आई है। अजय के साथियों से पूछताछ ने पता चला है कि प्रयागराज में उसने रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी की थी। हालांकि छात्र जीवन से ही वह शातिर था और फर्जीवाड़ा करता था। पुलिस अजय की कुंडली खंगाल रही है। 
एसीपी कैंट डॉ बीनू सिंह के मुताबिक पूरे मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है। साक्ष्य संकलन कर आगे की कार्यवाही की जाएगी। गिरोह में शामिल लोगों की कॉल डिटेल निकलवाई गई है। जल्द ही अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। 
सचिवालय - तीन माह में तीन बड़े कारनामेप्रदेश के विकास की नींव जिस भवन से रखी जाती है वह लगातार विवादों में नजर आ रही है। सचिवालय में पिछले तीन माह में तीन बड़े मामले सामने आ चुके हैं। जून माह में पशुपालन विभाग में टेंडर के नाम पर 11 करोड़ की ठगी, अगस्त माह में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में ठेका दिलाने के नाम पर छह करोड़ की ठगी और अब नौकरी के नाम पर खेल। इन सभी मामलों में सचिवालय कर्मियों की संलिप्तता रही है। सचिवालय में जलसाजों व अपराधियों की घुसपैठ ने सवाल खड़े कर दिए हैं।