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मोदी शुगर मिल के प्रबंधकतंत्र द्वारा किसानों के बकाया गन्ना भुगतान को लेकर धोखा धड़ी के आरोपों में प्रबंधक निदेशक व अधिकारियों के विरुद्ध होते रहे हैं मुकदमें दर्ज
September 17, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

(न्यूज़)।लगभग दो सौ अस्सी करोड़ रुपये  मय ब्याज के किसानों का गन्ना भुगतान बकाया 
मोदी नगर 17 सितम्बर (चमकता युग) गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 प्रस्तर 3 (3A) के अंतर्गत मिल को गन्ना खरीद के 14 दिन के अन्दर गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाना अनिवार्य है अन्थया की स्थिति में गन्ना मूल्य पर विलम्बित अवधि का ब्याज भी देय है। परंतु मोदी शुगर मिल किसानों का गन्ना बकाया भुगतान नहीं कर रही है ? अब प्रबंधकों का तथा कथित रूप से कहना है कि फैक्ट्री को चालू करने में डी के मोदी अड़ंगा डाल रहे हैं, अब जब मोदी इंडस्ट्रीज लिमिटेड की मोदी इलेक्ट्रोड व अन्य फैक्ट्री चालू जायेगी तो किसानों का बकाया गन्ना भुगतान किया जायेगा, इसको लेकर,जब कि भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता हरेन्द्र नेहरा ने कहा कि मोदी ग्रुपों का बटवारे को लेकर इनका  आपसी विवाद है, इससे किसानों का कोई लेना देना नहीं है मोदी शुगर मिल के प्रबंधकों से ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है, जिस पर लिखा हो कि मोदी इलेक्ट्रोड आदि फैक्ट्री चालू होने पर ही किसानों का बकाया गन्ना भुगतान किया जाएगा । वरिष्ठ किसान नेता ने कहा कि उमेश कुमार मोदी , एम के मोदी व डी के मोदी का घरेलू बटवारे का मामला है उन्होंने कहा कि किसानों के बकाया गन्ना भुगतान को लेकर शीर्घ ही आन्दोलन चलाया जायेगा । 
उन्होंने कहा कि मोदी शुगर मिल पर 2011- 12 में गन्ना किसानों का बकाया लगभग अड़तालीस करोड़ रुपये था , मोदी शुगर मिल द्वारा समय पर नियमित किसानों का बकाया गन्ना भुगतान न करने पर बढ़ कर नवम्बर 20 तक लगभग दो सौ अस्सी करोड़ मय ब्याज के गन्ना किसानों का बकाया मोदी शुगर मिल पर चढ़ा हुआ है । शुगर मिल प्रबंधकतंत्र द्वारा समयावधि में गन्ना मूल्य भुगतान न कर आदेशों व निर्देशों की निरन्तर अवेहलना की जाती रही है । जिससे मिल क्षेत्र के किसानों में मोदी शुगर मिल के प्रति रोष व्याप्त है तथा उनके द्वारा लगातार धरना एवं आन्दोलन कर गन्ना मूल्य भुगतान कराये जाने की माँग की जाती रही है और की जाती रहेगी।  आ आज किसानों का मोदी शुगर मिल प्रबंधकतंत्र द्वारा बकाया  गन्ना भुगतान किसानों का न देकर शोषण किया जा रहा है । जिससे गन्ना विभाग की छवि खराब हो रही है ?
गन्ना किसानों का बकाया भुगतान न होने के संदर्भ में सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव प्रभारी अजय कुमार सिंह ने दिनांक 22- 9 - 2019 को मोदी शुगर मिल के प्रबंधकतंत्र के विरुद्ध गन्ना नियमानुसार न करके स्थापित अधिनियम नियमावली, शासन एवं उच्च अधिकारियों के आदेशों व निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अपने निहित स्वार्थ में षड्यंत्र के तहत गन्ना मूल्य में देय धनराशि को अन्य प्रयोजन में खर्च कर लिया तथा किसानों के गन्ना भुगतान रोक कर उनके खिलाफ धोखाधड़ी की जा रही है तथा मोदी शुगर मिल द्वारा टैंगिग आदेशों का उल्लंघन करने तथा सुनियोजित षड्यंत्र के तहत कृषकों का गन्ना खरीद कर उनका गन्ना मूल्य भुगतान समय से न कर कृषकों के साथ विश्वासघात एवं सार्वजनिक धन दुर्विनियोग करने के लिए मोदी शुगर मिल के प्रबंधक निदेशक उमेश कुमार मोदी ,निदेशक सुनील कुमार गुप्ता, अध्यासी वेद पाल सिंह मलिक के विरुद्ध कृषक हित में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 एवं भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 120 (बी0) एवं समस्त सुंसगत धाराओं के अन्तर्गत प्राथमिकी स्थानीय थाने में दर्ज की गई । हालाँकि अभी तीनों में से किसी भी गिरफ्तारी नहीं हुयी है ।
इससे पूर्व में उक्त आरोपों में थाना मोदी नगर में दिनांक 30- 11- 2013 को एफ आई आर संख्या 656/2013 आई पी सी की 1860 धारा 420, 120 बी के तहत मोदी शुगर मिल के प्रबंधक निदेशक उमेश कुमार मोदी सहित नो अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई । के उपरांत दिनांक को एफ आई आर संख्या 120/ 2015 आई पी सी 1860 की धारा 420, 406,और 120 बी के मोदी शुगर मिल के प्रबंधक निदेशक उमेश कुमार मोदी सहित नो अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई । के उपरांत दिनांक 26- 6- 2015 एफ आई आर संख्या 443/ 2015 आई पी सी 1860 की धारा 420, 406 और 120 बी में थाना मोदी नगर में प्राथमिकी दर्ज की गई । दिनांक 13-5- 2016 एफ आई आर संख्या 341/ 2016 आई पी सी 18 60 की धारा 420, 406 और 120 बी ,के तहत मोदी शुगर मिल के प्रबंधक निदेशक उमेश कुमार मोदी सहित नो अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई । प्राथमिकी स्थानीय थाने में दर्ज की गई । उपरोक्त चार प्राथमिकी की जांच प्रवर्तन निदेशालय भारत सरकार लखनऊ द्वारा की जा रही है, हालाँकि प्रवर्तन निदेशालय भारत सरकार लखनऊ द्वारा जांच बहुत ही धीमी गति से चल रही है ? वर्ष 2011- 12 से वर्ष 2019- 20 तक कितनी चीनी का विक्रय का किया गया उस   विक्रय चीनी से प्राप्त धनराशि को किस - किस बैंक में जमा किया गया तथा बैंक में जमा धनराशि का इस्तेमाल किस मद में कैसे -कैसे किया गया की जांच निष्पक्ष  तरीके से होनी चाहिये । हालाँकि जिला गन्ना अधिकारी गाजियाबाद ने  , न मालूम क्यों किसानों का गन्ना बकाया भुगतान को लेकर लापरवाही बरती है और बरती जा रही है । क्यों नहीं किसानों का  बकाया गन्ना भुगतान में  नियमानुसार शासनादेशों का पालन किया जा रहा है ।