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महिला जीवित है फिर भी हो गई  वरासत 
October 10, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

महिला जीवित है फिर भी हो गई  वरासत 
 
कार्रवाई के नाम पर निलंबन f.i.r. से क्यों बच रहे हैं अधिकारी

फतेहपुर।जमीनों की हेराफेरी करने वालों और तहसील में तैनात कुछ कर्मचारियों क़े गठजोड़ का मामला कोई नया नहीं बल्कि चोली दामन का रिश्ता है। जो पकड़ गया वह मामला खुल गया बाकी मामलो में फाइलो को धूल चाटने के अलावा कुछ भी हासिल नहीं होता।ऐसा ही एक मामला खागा तहसील क्षेत्र के खागा कस्बे का ही प्रकाश में आया है। जहां महिला जीवित है लेकिन तहसील के एक कर्मचारी ने भू माफियाओं से मिलकर वह कर दिखाया जिसे सुनकर लोगों की आंखे खुली की खुली रह गई। एक महिला के जीवित रहने के बावजूद भी उसकी जमीन की वरासत हो गई और खतौनी में नाम भी भू माफियाओं का आ गया। यह सब इतने आनन-फानन में हुआ की लोगों के समझने के पहले ही जमीन का मोल भाव भी शुरू हो गया। कार्रवाई के नाम पर केवल एक कर्मचारी का निलंबन, जबकि इसी कर्मचारी का ही सब कुछ किया धरा है।
       *अब हम उस जमीन का हिसाब किताब बताने जा रहे हैं* जिस जमीन में एक लेखपाल ने भू माफियाओं से मिलकर वह कर के दिखा दिया जिससे जिला मुख्यालय के अधिकारियों को शर्मसार होना पड़ा। खागा कस्बे के सहजादपुर में श्रीमती सुशीला देवी की करीब 2 बीघे जमीन है जो फसली खतौनी 1423-28 की खाता संख्या 1111 की तन्हा खातेदारी या श्रीमती सुशीला देवी पत्नी बिंदेश्वरी प्रसाद हाल मुकाम 334/ 56 सुभाष सदन लखीमपुर खीरी निवासी हैं के नाम दर्ज़ है। सुशीला देवी के जीवित रहते ही17 सितंबर2020 को कस्बे के ही अभिषेक अग्रहरी व हिमांशु अग्रहरि पुत्र बिंदेश्वरी प्रसाद के नाम वरासत हो गई। यह वरासत तहसील में ही काम करने वाले एक लेखपाल मोहम्मद अहमद की मिलीभगत से कर दिया गया। ऐसा नहीं है कि इस फर्जी वाडे की जानकारी तहसील में तैनात जिम्मेदार सरकारी नुमाइंदों को ना हुई हो,कुछ नुमाइंदों को तो फर्जी हो रही वरासत की जानकारी होते समय थी कुछ को होने के बाद हुई। यह भी खबर है कि जिस जमीन की वरासत फर्जी तरीके से हुई उसकी कीमत एक करोड़ से अधिक आकी जा रही है। जब लेखपाल और भू माफियाओं की करतूत प्रकाश में आई तो सारे मामले को रफा-दफा करने के लिए तहसील मुख्यालय तैनात एक अधिकारी ने मोल भाव भी किया लेकिन जब मामला न पटा तो लेखपाल को विभागीय कार्यवाही के घेरे में लेकर उसे निलंबित कर दिया गया। अब सवाल इस बात को लेकर पूछा जाना चाहिए कि जब वह महिला जिंदा है और उसकी बेशकीमती जमीन सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है तो फिर उसी जमीन की वरासत आनन-फानन में कैसे कर दी गई और वरासत के बाद उसे सरकारी कागजो में दर्ज कैसे कर दिया गया ।क्या सरकारीकागजो में इसे दर्ज होने मैं कई अधिकारियों की सहमति नहीं होती। यदि सहमति दी गई तो फिर ऐसे अधिकारी भी तो विभागीय कार्रवाई के घेरे में आते हैं। उन्हें विभागीय कार्रवाई से बाहर क्यो रखा जा रहा है। घोटाले को देखते हुए सवाल इस बात का भी पूछा जाना चाहिए की क्या इसमें एफ आई आर नहीं की जा सकती। एफ आई आर ना हो कहीं इस बात को लेकर बोली तो नहीं लगाई जा रही है।