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महामारी को लेकर आम लोगों के बीच दहशत, पंचायती राज विभाग 
September 11, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

भ्रष्टाचार वाली योजना बनाने में मस्त

दान देने के बजाय सरकारी धन हड़पने की हो रही है साजिश

फतेहपुर।कोरोना महामारी का तांडव जारी है लेकिन इस महामारी मे भी कुछ विभाग सरकारी धन को हड़पने की योजना को बनाने में पीछे नहीं है। वैसे जिस विभाग की हम बात करना चाह रहे हैं वह विभाग कमीशन लेने के नाम पर काफी कुख्यात है। समय-समय पर गंभीर आरोप भी लगते आ रहे है फिर भी इस विभाग के कुछ कर्मचारी अपनी आदतों को बदलने के लिए तैयार नहीं है । यह विभाग और कोई नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में विकास की जिम्मेदारी लेने वाला पंचायती राज विभाग है।
पंचायती राज विभाग द्वारा भ्रष्टाचार की एक ऐसी योजना को हमारे एक पत्रकार साथी हरीश शुक्ला ने उजागर किया । जिसमें भ्रष्टाचार की योजना बनाकर सरकारी धन को हड़पने की पूरी तैयारी थी लेकिन विभाग की तैयारी उस समय धरी की धरी रह गई जब एक जिले के जिलाधिकारी को ऐसी ही योजना बनाकर सरकारी धन को हड़पने की कोशिश मे प्रदेश सरकार द्वारा विभागीय कार्रवाई का शिकार होना पड़ा। कार्रवाई का असर फतेहपुर मे भी देखने को मिला। उसमें लाखों रुपए सरकार का न केवल बचा है बल्कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियो पर भी कारवाई का भय सताने लगा है । तभी तो बनाई गई योजना को हाथों-हाथ वापस ले लिया गया ।
चलो अब भ्रष्टाचार वाली योजनाएं की बात कर लेते है। योजना कोरोना किट की खरीद में भारी पैमाने पर लूट करने की थी। इस किट की खरीदारी ग्राम पंचायतों द्वारा की जानी थी। जिसका फरमान जिला पंचायत राज विभाग द्वारा जारी कर दिया गया था। किट की आपूर्ति करने वालों को भी इस विभाग ने तय कर दिया और संपूर्ण किट की लागत भी निर्धारित कर दी गई। जिसकी लागत 15300 रखी गई।कोरोना किट में ऑक्सीमीटर,मास्क, लेजर थर्मामीटर, सर्जिकल ग्लव्स, सैनिटाइजर और फेस सील्ड होने की बात कही गईं। यह किट फ़ील्ड में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को देनी थी । कोरोना वायरस से बीमार लोगों की बात कौन करे यहां तो इस महामारी में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार की योजना को अंतिम रूप देने में कर्मचारी जुटे रहे। 13 विकासखंड के 840 ग्राम सभाओं में यदि यह किट आपूर्ति हो गई होती तो सरकार को करीब सवा सौ करोड़ की चपत लग गई होती।
सरकारी विभाग हो या फिर व्यक्ति यदि भ्रष्टाचार में डूबे लोगों के आंखों का पानी मर जाय तो फिर ऐसे लोगों से ईमानदारी की उम्मीद लगाना बेमानी ही होगी। जब इस महामारी से लड़ने के लिए लोग बढ़-चढ़कर दान दे रहे हैं तो फिर इस त्रासदी में दान देने के बजाय भ्रष्टाचार की योजना बनाना कितना उचित होगा। सवाल भ्रष्टाचार में डूबे ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों से है कि यदि इस मौके पर भी उन्होंने ईमानदारी से काम नहीं किया तो आम जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगीऔर ना ही ऊपर वाला उन्हें छोड़ेगा।