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लंगडी चिकित्सा व्यवस्था ग्रामीण इलाके के मरीजों का नहीं कर पा रही इलाज़ 
September 24, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

लंगडी चिकित्सा व्यवस्था ग्रामीण इलाके के मरीजों का नहीं कर पा रही इलाज़ 
 
ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में जब चिकित्सक ही नहीं रहते तो फिर इलाज कौन करें

फतेहपुर।सरकारी चिकित्सा व्यवस्था देने का वादा प्रदेश सरकार बराबर कर रही है। वादे के अनुसार शहर से लेकर गांव तक छोटे बड़े अस्पताल भी बनकर तैयार है और इन्हें संचालित भी किया जा रहा है। लेकिन गांव में संचालित अस्पतालों की स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि यहां तैनात चिकित्सक ही सरकार की मंशा को ही मटिया मेट करने में लगे है। चिकित्सकों का गायब रहना झोलाछाप डॉक्टरों को बढ़ावा दे रहा है।
         *कोरोना वायरस* के महामारी का समय है।इस समय सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर विश्वास करना आवश्यक है। लेकिन पहले से ही गांव की सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पंगु हो तो फिर इस माहौल में वह कितना दौड सकेगी इसका अंदाजा अपने आप ही लग जाता है। गांव में संचालित अस्पतालों की दुर्दशा और वहां की अव्यवस्था पूर्व से ही जग जाहिर है,ऐसे में मरीज सरकारी चिकित्सा का लाभ कितना उठा पा रहा है यह भी बताने की जरूरत नहीं है। सब लोग जानते हैं लेकिन ऐसा लगता है कि जिला मुख्यालय में बैठने वाले स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी यहां की अव्यवस्था को लेकर जान कर भी अंजान बने हैं। गांव के मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों के सामने झोंक रहे हैं, जो सरकार की मंशा को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।
           *करीब 30 लाख* आबादी वाले इस जनपद में 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 16 एडिशनल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 20 न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित है। इन्हें संचालित करने के लिए 154 चिकित्सको की नियुक्त की गई हैं। चिकित्सकों के साथ में स्वास्थ्य विभाग ने अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा महिला स्वास्थ्य कर्मियों की भी स्वास्थ्य केंद्रों में पोस्टिंग की है। अब सवाल उठता है कि क्या यह स्वास्थ्य केंद्र यहां आए मरीजों का समुचित इलाज कर पा रहा है। ऐसे सवाल बराबर उठ रहे हैं और यह भी कहा जा रहा है कि तमाम ऐसे स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां स्वास्थ्य कर्मियों का आना जाना ही नहीं होता। इलाज की बात कौन करें। कुछ स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जो सप्ताह में एक या दो बार ही खुलते हैं। पूरे हफ्ते की हाजिरी लगाकर चिकित्सा विभाग को धोखा दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की यह व्यवस्था काफी पुरानी है।ऐसी व्यवस्था को ना ही खत्म किया जा पा रहा है। और ना ही लापरवाह चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियो पर लगाम नहीं लगाई जा पा रही है। जिससे सरकार का वादा हकीकत में नहीं बदल पा रहा है।
       *भारी भरकम वेतन लेने* वाले ऐसे लापरवाह चिकित्सकों पर सवाल तो बनता है सवाल इस बात को लेकर पूछा जाना चाहिए जब सरकार चिकित्सकों को वेतन से लेकर हर सुविधा मुहैया करा रही है। तो ऐसे चिकित्सक मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाने के लिए क्यों मजबूर कर रहे हैं,और छोटी-छोटी बीमारियों में उन्हें मौत के गाल में समाना क्यों पड़ रहा है।