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कोरोनावायरस शरीर में मौजूद बैक्टीरिया से मिलकर व्यक्ति को और ज्यादा बनाता है बीमार 
September 17, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

(न्यूज़)।कोरोना वायरस और शरीर में मौजूद बैक्टीरिया (माइक्रोबायोटा) मोटे और मधुमेह से पीड़ित लोगों के फेफड़ों पर किस तरह का प्रभाव डालते हैं, इस पर एक नई रिसर्च सामने आई है।जर्नल ई-लाइफ में प्रकाशित इस अध्ययन में कोरोना को मोटापे और मधुमेह से जोड़ने वाले मैकेनिज्म का आकलन किया गया है और यह बताया गया है कि कोरोनावायरस शरीर में मौजूद बैक्टीरिया से मिलकर व्यक्ति को और ज्यादा बीमार बनाता है,जिसके चलते मरीज को ना केवल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है बल्कि कभी-कभी उसे वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ता है।अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर से ताल्लुक रखने वाले और अध्ययन के सह लेखक फिलिप स्चेरेर ने कहा,हम सभी जानते हैं कि मोटे और टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित लोगों में कोरोना होने का खतरा ज्यादा होता है,लेकिन इसके लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं, इसका पता नहीं है।शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने उन कारकों पर दोबारा गौर किया जिनसे मोटे और मधुमेह पीड़ित लोगों में कोरोना होने का खतरा होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पूरे मैकेनिज्म को मोटे तौर पर दो समूह में विभाजित किया जा सकता है।एक समूह वह है जो मानव कोशिकाओं के एसीई2 रिसेप्टर से जुड़े होते हैं और कोरोना व पहले से मौजूद बैक्टीरिया के बीच संपर्क स्थापित करते हैं।वैज्ञानिकों ने बताया कि एसीई2 रिसेप्टर कोशिकाओं की सतह पर रहता है और वायरस इसका उपयोग मानव कोशिकाओं में पहुंचने के लिए करता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि मोटे या मधुमेह से पीड़ित लोगों में एसीई2 की संख्या बढ़ जाती है,जिससे वायरस का कोशिकाओं में प्रवेश करना आसान हो जाता और वायरस लोड बढ़ जाता है।