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कोरोना ने बदले रिवाज, मोहर्रम की नवी दसवीं में नहीं निकले ताजिया जुलूस
August 30, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

जहानाबाद (फतेहपुर )
वैश्विक महामारी कोविड-19 ने जिस तरह से दुनिया भर में आम जनजीवन को प्रभावित किया है तीज त्योहार भी उससे बचे नहीं हैं। भीड़ और चहल-पहल जिन त्योहारों की रौनक हुआ करती थी कोरोना काल में वो कब बीत गए पता ही नहीं चला। रमजान से लेकर इर्द और बकरीद तक तो इधर नवरात्र से लेकर बैसाखी, गुरू पूर्णिमा, सावन और श्रीकृष्ण जयंती भी बेहद सादगी से बीती। गम का महीना मुहर्रम भी इसी सादगी और कोरोना प्रतिबंधों के साथ बीत रहा है। इमामबाड़े, इमाम चौक और अखाड़े वीरान रहे न ताजिया सजाए गए हैं और न ही जुलूस निकले हैं। घरों में मजलिस और इमाम हुसैन को याद कर मुहरर्म का एहतमाम बेहद सादगी से किया गया।
  इस बार दूसरे त्योहारों की तरह मोहरर्म भी सूना ही बीत रहा हैं। न खूबसूरत ताजिये सजाए गए हैं और न ही अखाड़ों की फन ए सिपहगिरी देखने को मिल रही है। सड़कों से हजारों की भीड़ वाले जुलूस नदारद रहे। इतना ही नहीं ताजिया सजाने वाले कारीगर भी बेरोजगार हो गए हैं। सरकार ने संक्रमण का फैलाव रोकने के लिये गाइडलाइंस जारी की थी जिसके तहत पाबंदियों के साथ मुहर्रम का महीना बीत रहा है।
 शाशन के द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत मोहर्रम के अवसर पर किसी प्रकार के जुलूस व ताजिया की अनुमति नहीं दी गई थी। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी दशा में शस्त्रों का प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं रही। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कस्बा सहित पुरे थाना क्षेत्र में प्रशासन द्वारा दिशा-निर्देशों का पालन कराया गया।
जहानाबाद कस्बे के शहर काज़ी शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना शफी नूरी ने बताया कि कस्बे में विभिन्न मोहल्लों में काज़ी टोला, बाकरगंज, औरंगाबाद, मालिकपुर, बाम्बा ऊपर, गढ़ी, रज्योडा सहित दर्ज़नों ताजिया मुहर्रम के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग इमाम हुसैन की शहादत में गमजदा होकर उन्हें याद करते हैं शोक के प्रतीक के रूप में इस दिन ताजिये के साथ जूलूस निकालने की परंपरा रही है ताजिये का जुलूस इमाम चौक से निकलता है और कर्बला में जाकर खत्म होता है जो कोरोना वायरस संक्रमण के चलते जुलूस व ताजिया नहीं निकाले गए।