ALL राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य राजनीति अपराध विशेष विज्ञापन दुनिया कोविड-19 (कोरोना वायरस)
कोरोना के बहाने जिम्मेदारों ने आम जनता से मुंह मोड़ा
August 29, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

कामों को लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोग

पहले की तरह ही मुंह बाए खड़ी है लोगों की समस्याएं
 
सरकार की योजनाएं कई पर हकीकत में लोगों को नहीं मिल रहा लाभ 

लोगों के सामने रोजी रोजगार का बड़ा संकट, काम की तलाश में भटक रहे लोग
 
नेता घरों में दुबके, वहीं से विकास का पीट रहे ढिंढोरा
 
कोरोना काल में आला अफसरों के प्रयास लाए रंग लेकिन मातहतों का जारी है गैर जिम्मेदाराना रवैया

फतेहपुर।कोरोना के बहाने विकास कार्यों एवं जन समस्याओं से जिम्मेदारों ने मुंह मोड़ रखा है। जिले के आला अधिकारी तो इस महामारी के संकट के दौर से लोगों को उबारने के लिए प्रयास कर रहे हैं लेकिन मातहत अधिकारी गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाए हैं।जनप्रतिनिधियों की कौन कहे? जनता से उनका संवाद ही खत्म हो गया है।अपने में मस्त नेता घरों से बैठे ज्ञान बघार रहे हैं। फतेहपुर जनपद ही नहीं पूरा विश्व कोरोना संक्रमण के बुरे दौर से गुजर रहा है। देश में कोरोना के दिन-ब-दिन बढ़ते मरीजों ने हर क्षेत्र में बुरा असर डाला है लेकिन इस महामारी से सबसे अधिक आम जनता व रोज कमाने खाने वाले लोग प्रभावित हुए हैं,जिनकी सुनने वाला कोई नहीं है। जन समस्याएं पहले की तरह ही मुंह बाए खड़ी हैं लेकिन उनके निराकरण के ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। अपने कामों को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने वाले लोगों को अधिकारी कर्मचारी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। जो कर्मचारी मिल रहे हैं उनके पास कोरोना का रटा रटाया बहाना रखा है।मायूस होकर दूरदराज से आने वाले लोग खाली हांथ बिना काम के वापस जाने को मजबूर हैं। 
    केंद्र व प्रदेश सरकार ने कोरोना काल में योजनाएं तो बहुत सारी चला दी जिससे आम गरीब जनता को राहत मिल सके, लेकिन हकीकत में यह योजनाएं जमीनी स्तर पर नहीं है। गैर जिलों व प्रांतों से वापस आए प्रवासियों के सामने रोजी रोजगार का संकट खड़ा है। दावे बड़े किए जा रहे हैं! लेकिन लोगों के बीच ना तो आत्मनिर्भरता दिखाई पड़ रही है और ना ही उनकी काम की तलाश खत्म हो रही है। विकासखंड स्तर से लेकर तहसील व जिला मुख्यालय तक के ज्यादातर दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहता है ना अधिकारी आ रहे हैं और न कर्मचारी। कोरोना में इनकी मौज-मस्ती जारी है।घरों में आराम फरमाया जा रहा है और अपने काम किए जा रहे हैं जबकि परेशान आम जनता दर-दर भटकने को मजबूर है। इसी का नतीजा है कि कामों की फाइलें दफ्तरों में डंप पड़ी हैं। केवल वही जरूरी काम जिम्मेदार निपटा रहे हैं जिनमें सरकार से उनकी जवाबदेही तय होनी है। कोरोना कॉल में चाहे जिलाधिकारी रहे हों या फिर उनकी टीम,लोगों को हर संभव सहायता मुहैया कराने के जितने प्रयास किए उतने ही गैर जिम्मेदाराना काम बाकी के अधिकारियों कर्मचारियों ने किए।वर्क टू होम के बहाने वो अधिकारी कर्मचारी मस्ती के मूड में रहे जिन विभागों तक आमजन की निगाहें नहीं पहुंचती हैं।

पूरे संक्रमण काल में जिला प्रशासन के मुखिया जिलाधिकारी,मुख्यविकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी,तहसीलदार व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को छोड़ दिया जाए तो बाकी के लोगों की कोरोना की खुमारी अब तक उतरी नहीं है।स्कूल कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई के जिम्मेदार कोई प्रयास ही नहीं करना चाहते हैं। सरकार व  विभागीय अधिकारी  व्यवस्थाएं मुहैया करा रहे हैं  लेकिन  जिम्मेदारों के पास बहाने लाख हैं। शायद उन्हें यह समझ में ही नहीं आ रहा कि आखिर सरकार उन्हें मोटी तनख्वाह क्यों दे। चाहे शिक्षा विभाग के लोग हों, विकास के या पुलिस प्रशासन के सभी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। तभी समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं को क्रियान्वित किया जा सकेगा लेकिन जिस तरह से यहां जिम्मेदारों ने अपनी भूमिका अदा की है। उससे लोगों के दिलों में टीस है।जनप्रतिनिधियों ने तो मानो लोगों से मुखातिब होना ही मुनासिब नहीं समझा है।इसका नतीजा रहा कि चुनाव के पहले लोगों से जो वायदे विकास के किए गए!क्या वह वादे पूरे हो रहे हैं या फिर उनको पूरा करने के प्रयास हो रहे हैं या नहीं, उन्हें देखने की फुर्सत जनप्रतिनिधियों को नहीं है। महामारी के इस दौर में अपने लोगों से दूरी यह दर्शाती है कि आखिर सेवक के रूप में अपने को प्रदर्शित करने वाले नेता आज आम जनता के बुरे दौर में मालिक की हैसियत से अपने घरों में दुबक कर बैठे हैं। घरों से ज्ञान व बघारा जा रहा है।ऐसे हालातों से जूझ रही जनता के सामने जनप्रतिनिधियों से आगामी चुनाव में सवाल खड़े करने के लाख बहाने होंगे? पर शायद नेता जनता के सामने निरुत्तर होंगे।