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खरीफ में उगाई जाने वाली फसलों को कीड़ों से बचाने के बताएं उपाय
August 27, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

फतेहपुर।जिला कृषि रक्षा अधिकारी सत्येन्द्र सिंह ने जनपद के किसानों को बताया कि  खरीफ़ में उगाई जाने वाली खाद्यान्न फसलों में धान का प्रमुख स्थान है। जिसमें कीट/रोग के फलस्वरुप उत्पादन प्रभावित होता है ,उनकी रोकथाम के लिए निम्न उपाय अपनाएं जिसके तहत धान की फसल में कीट/रोग नियंत्रण हेतु फसल दीमक फसल से पूर्व दीमक के नियंत्रण हेतु व्यूवेरिया बैसियाना की 2.5 किलो ग्राम मात्रा को 60 -75 किलोग्राम गोबर में मिलाकर 10 दिन तक छाया में रखने के उपरांत एक हेक्टेयर खेत में कीट छीटकर जुताई कर देना चाहिए । क्लोरोपायरीफ़ास 20 प्रति ईसी की 2.5 लीटर मात्रा सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें । जड़ की सूंडी कीट के नियंत्रण हेतु कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत दानेदार रसायन 20 से 25 किलोग्राम मात्रा का 3 से 5 सेंटीमीटर स्थिर पानी में बुरकाव अथवा क्लोरीपायरीपास 20 प्रतिशत 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए । बंका, हिस्पा, पत्ती, लपेटक एवं तना छेदक कीट नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूरान दानेदार 20 किलोग्राम अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4जी0 18 किलोग्राम 3 से 5 स्थिर पानी में प्रयोग करें । हरा, भूरा एवं सफेद पीठ वाला फुदका नियंत्रण हेतु कार्बोफ़्यूरान 3जी0 20 किलोग्राम 3 से 5 सेंटीमीटर स्थिर पानी में अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत ईसी 350 मिली अथवा एजाडिरेक्टिन जीरो से 15 प्रतिशत ईसी 2.50 लीटर प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें । भूरा फुदका कीट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस0एल0 की 50 मिलीलीटर मात्रा को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें । गांधीबग एवं सैनिक कीट इसके नियंत्रण हेतु एजाडिरेक्टिन जीरो से 15 प्रतिशत 2.50 प्रति हेक्टेयर 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें । जीवाणु झुलसा रोग में पत्तियों पर नसों के बीच कत्तई रंग की लंबी-लंबी धारियों बन जाती हैं ,नियंत्रण हेतु स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत ट्रेट्रासाइकिलिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत 15 ग्राम मात्रा एवं 500 ग्राम कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूयूपी के साथ मिलाकर प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर धान की फसल में छिड़काव करें ।  सीथ ब्लाइट रोग में पत्र कंचुल शीथ पर अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं जिसका किनारा गहरा भूरा तथा मध्य भाग हल्के रंग का होता है नियंत्रण हेतु कर्बेंडीजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू यूपी 500 ग्राम अथवा थायोसीनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्ल्यू यूपी एक किलोग्राम या प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 500 मिली प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें । झोंका रोग में पत्तियों पर आंख की आकृति के धब्बे बनते हैं जो मध्य में राख के रंग तथा किनारे गहरे कत्थई रंग के होते हैं जो पुष्प शाखाओं एवं गांठो पर काले भूरे धब्बे बनते हैं नियंत्रण हेतु मईकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू यूपी रसायन 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू यूपी 2 किलोग्राम को 500 से 600 पानी में घोलकर छिड़काव करें । खैरा रोग के नियंत्रण हेतु 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट को 20 किलोग्राम यूरिया अथवा ढाई किलोग्राम बुझे हुए चूने का प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें । कंडुआ रोग हेतु 2.5 ग्राम थ्रीरम अथवा 2 ग्राम कर्बेंडाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधन करें । कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्लूयूपी 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर या कॉपर हाइड्राक्साइड 77 डब्लू यूपी  2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।