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खनन माफियाओं के कब्जे में है  खनन विभाग व तहसील प्रशासन 
June 30, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

जिला प्रशासन को आगे आकर करनी होगी कार्रवाई की पहल ! 

फतेहपुर।

बे लगाम खनन विभाग उस पर लापरवाह तहसील प्रशासन तो फिर ओवरडैंपिंग व अवैध खनन के खेल को कौन रोक पाएगा,यह प्रश्न बार-बार उठ रहे हैं और जिला प्रशासन के कानों तक ऐसे प्रश्न पहुंच भी रहे फिर भी कार्रवाई के नाम पर मात्र दो या तीन जेसीबी व पोकलैंड मशीनों को सीज कर बरसात के इस मौसम में डैपिंग की गई मौरंग को अनाप-शनाप दामों में बेचने की जैसे परमिशन दे दी हो। मौरंग डंपिंग के खेल में जिले के ही नहीं बल्कि दिल्ली व लखनऊ के बड़े-बड़े खनन माफिया शामिल है।
     ओवरडैंपिंग में सारे नियम कानूनों को दरकिनार कर करोड़ों रुपए कमाने के चक्कर में सरकार के साथ जो धोखा किया जा रहा है उसमें सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है ।सारी काया माया खनन विभाग की है जिसके ही मेहरबानी के चलते पहले अवैध खनन किया गया फिर इस खनन के बाद मौरंग की ओवर डंपिंग की गई सब कुछ तहसील व  जिला प्रशासन के आंखों के सामने हुआ लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खाना पूरी की गई जो खनन माफियाओं के हौसलों को और भी बुलंदियों में पहुंचा दिया।
      जनपद की फतेहपुर व खागा तहसील अवैध खनन और डैपिंग के मुख्य इलाके हैं यहां मौरंग डैपिंग के 21लाइसेंस तो दिए गए लेकिन दिये गये लाइसेंस सेअधिक स्थानों में डैपिंग की गई जो खुलेआम प्रदेश सरकार के नियम कानूनों को अंगूठा दिखा रहे हैं ।बड़े-बड़े मौरंग के ढेर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि लाइसेंस के नाम पर सब कुछ गलत हुआ है फिर भी ना तो इन डैपिंग में एकत्र की गई मौरंग की नाप हुई है और ना ही इस बात की जांच की गई है कि जिन इलाकों में मौरंग एकत्र करने का लाइसेंस दिया गया है वह इलाका सही है या गलत है। इससे साफ जाहिर होता है कि खनन विभाग व तहसील प्रशासन पर बालू माफियाओं का कब्जा है ।और इसी कब्जे के चलते मौरंग खनन में वह सारे काम किए जाते हैं जो खनन नियमावली और एनजीटी के नियमों के विपरीत है। सत्ता पक्ष भी शांत है कहीं ना कहीं कई सत्ताधारी नेता भी इस खेल में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं और मालामाल भी हो चुके हैं। जो बाकी है वह भी इस खेल में शामिल होकर सरकार को भारी नुकसान पहुंचा कर अपनी जेब गर्म कर रहे हैं। सामाजिक कार्यों में जुड़े कई लोगों का मानना है कि खनन मे हमेशा नियमों का उल्लंघन किया गया और किया जा रहा है जो बंद होने वाला नहीं है क्योंकि स्थानीय सत्ताधारी ही नहीं चाहते कि अवैध खनन व ओवर डंपिंग का खेल बंद हो पिछली सरकारों में भी शामिल सत्ताधारी नेताओं ने ऐसे खेलों की खुले आम छूट दी थी। ऐसा लगता है कि अब कोई फरिश्ता ही यमुना नदी में हो रहे पर्यावरणऔर सरकार को लगने वाले करोड़ों रुपए के नुक़सान से बचा पायेगा। जिस तरह से अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए अवैध खनन करने वाले व कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। वैसे ही एक फरिश्ते की जरूरत है।सवाल तो कई बार पूछें गये। आज भी पूछने का मन हो रहा है कि जिला प्रशासन आखिर फरिश्ते का इंतजार क्यो कर रहा है उसके पास स्वयं इतनी ताकत है कि वो ओवर डैपिंग के खिलाफ अभियान चलाकर सरकार को करोड़ों रुपए का फायदा करा सकता है।