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खागा का बहुचर्चित तिहरा हत्याकांड - 24 वर्षों बाद आये फैसले में 15 को अजीवन कारावास - क्रास केस के जिला पंचायत अध्यक्ष पति सहित सभी आरोपी बरी
October 19, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

खागा का बहुचर्चित तिहरा हत्याकांड
- 24 वर्षों बाद आये फैसले में 15 को अजीवन कारावास
- क्रास केस के जिला पंचायत अध्यक्ष पति सहित सभी आरोपी बरी
फतेहपुर। जनपद के खागा कस्बे में बस स्टाप के निकट लगभग चैबीस वर्ष पूर्व दो पक्षों की गोलीबारी में तीन लोगों की मौत के मामले में चैबीस साल बाद सोमवार को फैसला आया। इसमे हत्याकांड में नामित जहां पन्द्रह आरोपियों को आजीवन कारावास का दण्ड मिला। वहीं एक आरोपी को बरी कर दिया गया। जबकि दो अन्य अभियुक्तों की दौरान मुकदमा मौत हो गयी थी। सजा पाये सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। वहीं इसी मामले में क्रास केस में अभियुक्त बनाये गये जिला पंचायत अध्यक्ष के पति सहित सभी आरोपियों को अदालत द्वारा बरी कर दिया गया। फैसले को लेकर दीवानी न्यायालय परिसर सुबह से ही छावनी में तब्दील रहा। 
बताते चलें कि खागा कस्बे के बस स्टाप के निकट 06 अगस्त 1996 को दो पक्षों के मध्य जमकर दिनदहाड़े गोलाबारी हुई थी। इसमे तीन लोगों रामनिरंजन, राकेश सिंह व सुनील कुमार की मौत हो गयी थी। तिहरे हत्याकांड को लेकर प्रशासन में हड़कम्प मच गया था। उस समय नासिर कमाल पुलिस अधीक्षक की हैसियत से तैनात थे। मृतकों की ओर से राजेश सिंह उर्फ मन्ना सिंह ने नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमे ताराचन्द्र पाण्डेय, पूर्णानन्द पाण्डेय, नीरज पाण्डेय, बडकू पाण्डेय, नवल पाण्डेय, ज्ञान सिंह, विजय कुमार, संतोष कुमार, रामआसरे सिंह, कमल पाण्डेय, राजेन्द्र सिंह नोनिहा, संजय मिश्रा, मुकेश पाण्डेय, राजेश पाण्डेय, कुलदीप कुमार पाण्डेय, प्रमोद कुमार पाण्डेय उर्फ पप्पू पाण्डेय, प्रकाश पाण्डेय व संतोष पाण्डेय को आरोपी बताया गया था। जबकि दूसरे पक्ष से फायरिंग में घायल हुए ज्ञान सिंह, विजय कुमार विश्वकर्मा की ओर से ब्रम्हदेव पाण्डेय ने मुकदमा दर्ज कराया था। 
इसमे वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष के पति अभय प्रताप उर्फ पप्पू सिंह, जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष उदय प्रताप उर्फ मुन्ना सिंह, सुनील सिंह, मन्ना सिंह उर्फ राजेश सिंह, राम निरंजन सिंह, बडका तिवारी, राकेश सिंह तथा गुड्डा उर्फ अरविन्द सिंह को अभियुक्त बनाया गया था। इनमे रामनिरंजन सिंह के अलावा सुनील सिंह की दौरान मुकदमा मौत हो चुकी है। लगभग 24 वर्षों तक चले इस मुकदमे में लगभग दो दर्जन से अधिक न्यायाधीश बदल गये। सोमवार को आये फैसले में अपर जिला जज कोर्ट नम्बर-3 अजय कुमार प्रथम ने हत्या के मामले में अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपी बडकू पाण्डेय को जहां रिहा कर दिया। 
वहीं इस मुकदमे में नवल पाण्डेय व एक अन्य की दौरान मुकदमा मौत हो गयी है। शेष पन्द्रह अभियुक्तों को आजीवन कारावास का दण्ड सुनाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता शिव किशोर व वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व बार अध्यक्ष बलिराज उमराव व उनके बेटे विवेक उमराव ने पैरवी की थी। सजा सुनाये जाने के बाद जमानत पर दौरान मुकदमा रहे सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है। आरोपियों को सजा सुनाते ही उनके परिजनों में चीख पुकार मच गयी। सजा पाये एक आरोपी ने कहा कि वह अदालत के निर्णय से संतुष्ट नही हैं और इस फैसले को क्रास केस के सभी अभियुक्तों को बरी करने पर निर्णय को एकपक्षीय करार देते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही। 
उधर इसी हत्याकांड से सम्बन्धित क्रास केस में सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों को खारिज कर व बचाव पक्ष के अधिवक्ता बलिराज उमराव व विवेक उमराव की दलीलों के आधार पर विद्धान न्यायाधीश ने मृतकों के अलावा शेष पांच अभियुक्तों को बरी कर दिया। इस मामले में भी शासकीय अधिवक्ता की हैसियत से शिव किशोर ने दलीलें पेश की थी। बताते चलें कि यह मामला सियासी दलों से जुडे लोगों का था। इसलिए इस फैसले को लेकर लोगों में दिन भर चर्चाएं होती रहीं।