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कौन कहे  कहे और किससे कहे दोनों चित्रों को गौर से देखिए
July 31, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

फ़तेहपुर। पहला शहर के चित्रांश नगर इलाक़े में स्थित चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल का है तो दूसरा फ़तेहपुर शहर के पीरनपुर इलाक़े में स्थित चन्द्रा बालिका इण्टर कालेज का है। इन दोनो चित्रों में सम्बंधित विद्यालयों के प्रबंधतन्त्र वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से सम्बंधित संक्रमण को रोकने के प्रति क़तई गंभीर नहीं दिख रहे हैं। पहले चित्र में सीपीएस की छात्रा कशिश गुप्ता जिसने स्वचालित सेनिटाइजर मशीन बनाकर अपनी मेधा का परिचय दिया, उसके साथ फ़ोटो सेशन में विद्यालय की निदेशक मिस प्राची श्रीवास्तव समेत विद्यालय की सबसे वरिष्ठ शिक्षिका तबस्सुम सिद्दीकी व एक अन्य शिक्षक खड़े हैं। बड़ी बात यह है कि सरकार की स्पष्ट एवं सख़्त गाइड लाइन के बावजूद विद्यालय के इन तथाकथित तीनो जिम्मेदारो ने मास्क लगाना उचित नहीं समझा है जबकि छात्रा कशिश ने ज़रूर मास्क लगा रखा है। यानी उक्त छात्रा की मास्क के प्रति गंभीरता इन तीनो के मुक़ाबले कहीं अधिक है...! अब सवाल यह उठता है कि जब शहर के अग्रणी शिक्षण संस्थान के ज़िम्मेदार वैश्विक महामारी के प्रति स्वयं गंभीर नहीं हैं तो इनसे विद्यालय के अन्य बच्चों और स्टाफ़ के सदस्यों के लिये बेहतर सन्देश देने या कोरोना के प्रति समाज को जागरुक करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
दूसरे चित्र में चन्द्रा बालिका इण्टर कालेज विद्यालय के प्रधानाचार्य उमेश चंद्र गुप्ता एवं प्रीति गुप्ता के साथ विद्यालय परिवार के तमाम सदस्य एवं छात्रायें दिख रही हैं। अवसर है विद्यालय के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट स्थान पाने वाली छात्राओं को सम्मानित किये जाने का। इस अवसर पर हाईस्कूल की सांझ सिंह चौहान,  निधि तिवारी, शिप्रा शुक्ला,  प्राची पांडे,  इबरत अय्यूब, कु०शालिनी, आफरीन, बुसरा वारसी, शहरीन मुमताज एवं इंटरमीडिएट में अलीशा शाह, उमरा फातमा, योग्यता तिवारी, जीनत परवीन, कुमारी निहारिका गुप्ता, जुबेरिया फात्मा, अफसाना खातून, शबेनूर को उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने पर शील्ड व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई। यानी बाक़ायदे कार्यक्रम आयोजित किया गया और बाद में फ़ोटो सेशन के दौरान समाजिक दूरी का ज़रा भी ध्यान नहीं रखा गया। इस मौक़े पर सरकारी गाइड लाइन की सलीके से धज्जियाँ उड़ाई गई। यहाँ पर यह कहना क़तई ग़लत न होगा कि जब विद्यालय के प्रबंधक, प्रधानाचार्य व अन्य शैक्षणिक स्टाफ़ का इतना ग़ैर ज़िम्मेदाराना रुख़ है तो समाज को इनसे बेहतर संदेश की उम्मीद कैसे की जा सकती है...! सवाल फिर वहीं पर खड़ा है कि आख़िर कौन कहें और किससे कहें...! जब जनपद में माध्यमिक शिक्षा के मुखिया डीआईओएस इस मद में स्वयं गंभीर नहीं है और डीएम के मौजूदगी वाले कार्यक्रम में मास्क लगाना अपनी तौहीन समझते हैं और उनसे प्रशासनिक ज़िम्मेदार जवाबतलब तक करना मुनासिब नहीं समझते हैं तो इन तथाकथित शिक्षा के मंदिरो के ठेकेदारों की ऐसी हरकते आगे भी जारी रहें तो शायद अचरज न होगा।