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July 31, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


 
रेलवे कालोनी रेपकांड में फिर बेनक़ाब हुई पुलिस

दो सप्ताह बाद समान धाराओं में क्रास रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई एफ़आईआर

रेल कर्मी पति को गिरफ़्तार कर उसकी नौकरी की दुहाई देकर डाला जा रहा सुलह का दबाव

अब तक नहीं कराया गया पीडिता का चिकित्सीय परीक्षण

तो फिर योगी की पुलिस की क्यों न हो चहुओर फ़ज़ीहत

नौगाँव रेप कांड की ही तरह शहरी पुलिस की भूमिका भी रही संदिग्ध

फ़तेहपुर। एक रेलवे कर्मी की पत्नी के साथ आए दिन होने वाली छेड़खानी की घटनाओं को अनदेखा कर देने का परिणाम यह हुआ कि मनचलो ने पूरे इत्मिनान से दीवार फाँदकर घर में घुसने के बाद सामूहिक बलात्कार किया और धमकियाँ देते हुए फ़रार हो गये। शहर क्षेत्र के रेलवे कालोनी की इस घटना के पूरे दो सप्ताह के बाद शहरी पुलिस ने पीडिता की एफ़आईआर तब दर्ज की है जब आरोपी पक्ष से भी समान धाराओं में उसके पति व एक अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करा दिया गया। वहीं अभी तक पीडिता का चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं कराया गया है। जबकि घटना के अगले दिन ही वह अपने पति के साथ पुलिस कप्तान से मिलकर भी आपबीती सुना चुकी थी, बावजूद इसके उसकी फ़रियाद नक्कारखाने में तूती साबित हुई। सूत्र बताते है कि आरोपियों से सेटिंग-गेटिंग के चलते सम्बंधित चौकी इंचार्ज के सुलह-समझौता कराने के प्रयास जब नाकाफ़ी साबित हुए तो योजनाबद्ध ढंग से पीडिता के पति पर मामला गढ़कर उसे उसे गिरफ़्तार कर लिया गया और अब दूसरे माध्यम से रेप पीडिता पर सुलह के दबाव डलवाये जा रहे हैं। शहर के रेलवे कालोनी निवासी एक रेलवे कर्मी की लगभग बाइस वर्षीय पत्नी के साथ एक अन्य रेलवे कर्मी के मनचले पुत्र ने अपने एक दबंग मित्र के साथ मिलकर कई बार छेड़खानी कर चुके थे। जिसकी शिकायत भी पीडिता के पति ने इन मनचलो के घर में की थी किंतु इसका कोई असर नहीं पड़ा, उल्टे विगत 25 मई 2020 को दबंगो ने उसके घर में घुसकर दुष्कर्म का प्रयास किया किंतु महिला द्वारा शोर मचा देने से वह अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो सके। पीडिता ने इसकी तहरीर भी कोतवाली में दी किंतु कोई कार्यवाही न होने से इन दबंग मनचलो का मन इतना बढ़ गया कि विगत 16 जुलाई 2020 को रात्रि 10 बजे के क़रीब उस समय दीवार फाँदकर घर में घुसे जब वह अकेली थी। दोनो ने उसके साथ जबरन मुँहकाला किया और धमकियाँ देते हुए आराम से चले गये। घटना के तुरंत बाद पीडिता ने हरिहरगंज चौकी जाकर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी किंतु कोई सुनवाई न होने से कोतवाली जाकर घटना से सम्बंधित तहरीर दीं गई। कोतवाली से भी निराशा हाथ लगने के बाद पुलिस कप्तान से मिलकर मुक़दमा दर्ज कराने की गुहार लगाई। इस बीच आरोपी लगातार पीडिता एवं उसके पति पर सुलह का दबाव बनाते रहें किंतु जब वह नहीं मानी तो पुलिस ने आरोपी पक्ष से भी पिछली तारीख़ में तहरीर मँगवाकर पीड़िता के पति एवं एक अन्य युवक के ख़िलाफ़ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया फिर उसके बाद दो सप्ताह पुरानी तहरीर पर उसकी एफ़आईआर दर्ज की गई। खबर है कि पुलिस ने दोनो एफ़आईआर के चारों नामज़दों को गिरफ़्तार भी कर लिया है और अब जब क्रास रिपोर्ट हो गई है तो सुलह-समझौते की राह आसान बनाने के प्रयास तेज कर दिये गये हैं। खबर यह भी है कि पीडिता को कोतवाली बुलाकर सिस्टम के अलंबरदार पति की नौकरी की दुहाई देकर सुलह-समझौते का दबाव बनाया जा रहा हैं...! निःसंदेह यह उच्च स्तरीय जाँच का विषय है।
 इस प्रकरण ने एक बार फिर पुलिस का चेहरा बेनक़ाब कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जब दो सप्ताह से पीडिता की तहरीर कोतवाली में पड़ी थी तो आरोपी पक्ष की एफ़आईआर दर्ज करने के बाद उसका मुक़दमा क्यों लिखा गया और इतने समय बाद भी उसका डाक्टरी परीक्षण क्यों नहीं कराया गया! जघन्य अपराधों पर भी पुलिस का इतना नकारात्मक रवैया ही वर्दी की ऊपर तक फ़ज़ीहत का न सिर्फ़ कारण बन रहा है बल्कि योगी सरकार के सिस्टम पर सवाल भी खड़ा कर रहा है। 
     ग़ौरतलब है कि विगत 11 जुलाई 2020 को हुसैनगंज थाने के नौगाँव में पिछड़ी जाति की युवती के साथ हुई दुष्कर्म की घटना को भी थाना पुलिस ने 19 जुलाई 2020 को तब दर्ज किया था जब मीडिया में मामला खूब उछलने के बाद पुलिस की जमकर किरकिरी हुई थी। नौगाँव प्रकरण में भी पुलिस कुछ इसी तरह क्रास रिपोर्ट का ताना-बाना बुन रही थी, किंतु उस समय वह अपने मक़सद में तो कामयाब नहीं हो पाई थी, किंतु प्रयास अभी भी ज़ारी हैं। शायद इसीलिए अभी तक अभियुक्तों की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी है।