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कैसे तय होती है चैनल्‍स की आमदनी का अहम जरिया बनी TRP, मौजूदा स्‍वरूप पर जानें एक्‍सपर्ट व्‍यू
October 9, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)हम अक्‍सर टीवी चैनल्‍स के टीआरपी मतलब टेलीविजन रेटिंग प्‍वाइंट (Television Rating Points) में अव्‍वल रहने की बात सुनते हैं। लेकिन, क्‍या आप इसके बारे में इससे अधिक कुछ जानते हैं। यदि नहीं तो हम आज आपको इसकी पूरी जानकारी देते हैं। दरअसल, किसी भी टीवी चैनल्‍स लोगों के बीच कितना पॉपुलर है इसका निर्धारण टीआरपी के माध्‍यम से ही किया जाता है। इसमें भी टीवी चैनल्‍स पर आने वाले विभिन्‍न कार्यक्रमों की टीआरपी अलग-अलग होती है। ये ऊपर-नीचे हो सकती हैं। टीआरपी मांपने का काम ब्रॉडकास्ट आडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (Broadcast Audience Research Council) करती है।

एक्‍सपर्ट की राय

टीआरपी को लेकर अब जो बहस छिड़ी है उसमें इसकी प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। वरिष्‍ठ पत्रकार डॉक्‍टर वर्तिका नंदा की राय में टीआरपी को मापने के मौजूदा स्‍वरूप में बदलाव की जरूरत है। इसको लेकर कई बार आवाज भी उठी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। सूचना प्रसारण मंत्रालय की तरफ से समय समय पर चैनल्‍स पर हुए मीडिया ट्रायल्‍स को लेकर गाइडलाइंस जारी की गई थीं। इसका असर भी देखने को मिला था। लेकिन फिर वही हो गया। एक विडंबना ये भी है कि टीआरपी को लेकर भारत में कोई ठोस कानून नहीं है। वर्तमान में टीवी की रेगुलेटरी बॉडी बना नेशनल ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन कागजों पर अधिक दिखाई देता है। फिलहाल ये कुछ कानूनी निकाय बनकर रह गया है। लेकिन यदि इसका अधिकार क्षेत्र बढ़ा दिया जाए तो इस समस्‍या से निपटा जा सकता है।

गिर गई टीवी की विश्‍वसनीयता 

मौजूदा समय में देश के करोड़ों दर्शकों को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि आखिर टीआरपी कैसे तय की  जाती है। इसको तय करने वाली बीएआरसी को चाहिए कि वो इसके बारे में देश के करोड़ों दर्शकों को सटीक जानकारी दे। टीआरपी को मापने में देश के सभी राज्‍यों को शामिल नहीं किया गया है। वर्तमान में टीआरपी को लेकर इतने बड़े पैमाने पर पहली बार बहस होती दिखाई दे रही है। इसकी वजह से टीवी की विश्‍वसनीयता काफी नीचे गिर गई है। लेकिन अफसोस की बात है कि इसमें पत्रकारिता के भविष्‍य को लेकर कोई चिंता नजर नहीं आती है। यदि ऐसा ही रहा तो पत्रकारिता का आने वाला समय बेहद खराब होगा। 

कैसे होता है निर्धारण

अब यहां पर दूसरा सवाल ये है कि इसका निर्धारण कैसे किया जाता है। आपको बता दें कि ये दरअसल वास्‍तविक आंकड़े न होकर एक अनुमानित आंकड़े होते हैं। भारत जैसे देश में जहां करोड़ों दर्शक मौजूद हैं वहां पर इसको मापना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में ब्रॉडकास्ट आडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया इसको मापने के लिए सैंपल्‍स का सहारा लेती है। बीएआरसी अपनी सैंपल में देश के विभिन्‍न राज्‍यों के विभिन्‍न शहरों, इलाकों को इसमें शामिल करती है। इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों को किया जाता है। इसमें भी इसकी सैंपलिंग में विभिन्‍न आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया जाता है। इसमें शामिल सभी लोग विभिन्‍न कार्यक्षेत्रों से होते हैं। बीएआरसी इसको मापने के लिए सैंपल साइज के आधार पर अपने उपकरण वहां पर लगाती है, जिसको बारओ मीटर (BAR O Meters) कहा जाता है।