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कहीं भू माफियाओं के इशारे पर पुलिस काम तो नहीं कर रही
September 7, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


 
भू स्वामियों के बीच दहशत का माहौल

फतेहपुर।जिसकी लाठी उसी की भैंस वाली यह लोक कहावत काफी चर्चित है और ऐसे में भू माफियाओं का साथ यदि पुलिस देना शुरू कर दें तो लाठी भी भू माफियाओं के पास  होगी और कानूनी ताकत भी। जब इतना सब कुछ भू माफियाओं के पास है तो  बेशकीमती जमीन को उनके पास आने से कोई भी रोक नहीं सकता। तभी तो भू माफियाओं के इशारे पर एक ही दिन में दो-दो एफ आई आर । बस f.i.r. करने वाले किरदार बदल गए। ताबड़तोड़ दर्ज हुए मुकदमे के बाद भूस्वामियों के बीच दहशत का माहौल है। जब रखवाले ही भू माफियाओं की लाठी के आगे  बौने हो जाए तो दहशत का माहौल होना ही है। 
हम यहां एक सितंबर को उप निबंधक।      (रजिस्ट्री ऑफिस) कार्यालय में हुई मारपीट के साथ-साथ आबू नगर इलाके में हुई एक अन्य घटना के बारे में बात करना चाह रहे हैं। दोनों घटनाएं कहीं ना कहीं इलाकाई पुलिस की बेबसी को जाहिर करती हैं और इसी बेबसी के चलते बेशकीमती जमीन में कब्जा करने का जो सिलसिला चल पड़ा है वह रुकने का नाम नहीं ले रहा। अब जो नया तरीका इन भू माफियाओं ने ढूंढ निकाला है उसमें संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराओ फिर जमीन अपने कब्जे में लो। शायद ऐसा ही तरीका जोनिहा चौराहे (फतेहपुर शहर ) की एक जमीन को हथियाने को लेकर अपनाया गया है। जोनिहा चौराहे की इस जमीन में दो भू माफियाओं की  निगाहें लगी थी। जब एक पक्ष रजिस्ट्री ऑफिस में जमीन की लिखा पढ़ी करवाने पहुंचा तो दूसरा पक्ष भी वहां जा पहुंचा। दोनों पक्षों में मारपीट हुई एक पक्ष ने अपने राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए मामूली मारपीट की घटना को जानलेवा हमला में बदल दिया और 5 लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया। यह मामला यहीं नहीं रुका दूसरा मुकदमा फिर उन्हीं लोगों के विरुद्ध दर्ज हुआ जिनके विरुद्ध रजिस्ट्री ऑफिस में मारपीट के बाद 307 का मुकदमा दर्ज हुआ था लेकिन दूसरे मुकदमे में पहले दर्ज हुए 307 मुकदमे के दो ही लोगों को शामिल किया गया। अब जब कानूनी शिकंजा दूसरे पक्ष को जकड़ लिया तो जमीन बेचने वाले ने भी पाला बदलना ठीक समझा। तभी तो भूस्वामी का नाम दूसरी f.i.r. में नहीं था।
सवाल बार-बार इलाकाई पुलिस पर उठ रहे हैं कि रजिस्ट्री ऑफिस में मामूली धक्का-मुक्की और मारपीट में जानलेवा हमला जब नहीं हुआ तो 307 का मुकदमा दर्ज करना कितना उचित है। इतना ही नहीं उसी रात एक घर में हुई संदिग्ध फायरिंग की वारदात को लेकर उन्हीं लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया जिन्हें 307 में मुल्जिम बनाया जाता है। दो-दो दर्ज हुए एफ आई आर के बाद इलाकाई पुलिस पर उंगली उठना स्वभाविक है। इतना ही नहीं यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस अब भू माफियाओं की  लाठी बन गई है। इनके आगे घुटने टेक चुकी है। यदि मुकदमा दर्ज करने क्या यही तरीका शहर की बेशकीमती जमीन के हथियाने को लेकर जारी रहा तो जमीन मालिक अपनी जमीनों की बचा नहीं पाएंगे।