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जीर्ण शीर्ण हो रहा प्राचीन ईटो से निर्मित मध्यकालीन विष्णु मंदिर
June 21, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

तेंदुली गाव मे बना है प्राचीन ईटो का यह मंदिर 
पुरातत्व विभाग द्वारा है संरक्षित,1996मे किया था अधिग्रहण 
राष्ट्रीय महत्व संस्मारक वाला स्थल है घोषित

गिरिराज शुक्ला
बिंदकी फतेहपुर

विरासत में मिली धरोहर किसी समाज व जिले के लिए उसकी पूंजी होती है।फतेहपुर में ऐसे तमाम की स्थल हैं जो धरोहरों के रूप में विकसित होने की राह देख रहे हैं। प्राचीन मंदिर व किले भी जिले की शान बढ़ाते हैं जो अब जीर्ण शीर्ण होते जा रहे हैं।बिदकी तहसील के तेंदुली गांव में मध्यकालीन शैली पर बना भगवान विष्णु का देवालय भी उसमे से एक है।यहां पर स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा को क्षेत्र में चर्तुभुजी बाबा के नाम से जाना जाता है।प्राचीन ईंटों से निर्मित मंदिर की कंगूरेदार छत अनूठी वास्तुकला की मिसाल पेश कर रही है।इस मंदिर में ईटों पर की गई नक्काशी देखने लायक है।गर्भ गृह में कमल पर खड़ी प्रतिमा आस्था-भक्ति का केंद्र बनी हुई है।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने मंदिर की प्राचीनता व वास्तुकला को देखते हुए वर्ष 1996 में इस मंदिर को अधिग्रहण किया था।अब इस मंदिर को कोई भी तोड़ नहीं सकता है यदि कोई क्षति  पहुंचाता पाया जाता है तो उस पर एक लाख ₹का जुर्माना भी किया जा सकता है।पूर्वाभिमुख देवालय का बाहरी हिस्सा पुरानी ईंट का बना हुआ है। गर्भगृह में कमल के आकर में बने चबुतरे में भगवान विष्णु की चार भुजा वाली खड़ी मूर्ति स्थापित है।यह माना जा रहा है कि यह मंदिर 18 वीं शताब्दी का बना हुआ है जिसमें वास्तु का अनूठा संगम है।मंदिर के साथ एक द्वार मंडप बना हुआ है।जिसमें इस्लामी वास्तु का प्रभाव झलक रहा है। चर्तुभुजी बाबा के नाम से चर्चित इस मंदिर गांव की नहीं आसपास के गांवों की आस्था जुड़ी हुई है। रख-रखाव के अभाव के कारण प्राचीनता का गवाह मंदिर जीर्ण-शीर्ण होता जा रहा है। मंदिर की वास्तु कला को सहेजने के कोई प्रयास न करने से ग्रामीणों में रोष है।युवा विकास समिति  के जिला प्रवक्ता आलोक गौड़ कहते हैं कि मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन होने से इस मंदिर में नया निर्माण भी नहीं कराया जा सकता।इसलिये विभाग को चाहिए कि भगवान विष्णु के प्राचीन मंदिर को नया रूप दें।यह  विष्णु मंदिर जिले की धरोहर है। इसमें उपयोग की गई ईंट व कंगूरीदार छत की नक्काशी में मध्यकालीन शैली के दर्शन होते हैं।