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जरूरी है मूल शांति की पूजा
October 6, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

जरूरी है मूल शांति की पूजा

(न्यूज़)।अगर किसी बच्चे का जन्म 'गंड मूल नक्षत्र' में होता है।क्या वाकई गंड मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे खुद या परिवार के लिए परेशानी लाते हैं।इस स्थिति में शांति पाठ कराना कितना फलदायी है।पहले जान लेते हैं कि गंड मूल नक्षत्र हैं क्या।धर्मशास्त्रों में कुल 27 नक्षत्रों का वर्णन मिलता है,जिनमें से कुछ नक्षत्र शुभ,तो कुछ अशुभ माने जाते है।इन अशुभ नक्षत्रों को ही गंड मूल नक्षत्र कहा जाता है।वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी,आश्लेषा,माघ,ज्येष्ठा, मूल और रेवती।इन नक्षत्रों का जातक पर शुभ और अशुभ,दोनों प्रभाव होता है और इसका विचार कुंडली में इन 6 नक्षत्रों में किसी एक में चंद्रमा की स्थिति,और नक्षत्र किस भाव में है,को देखकर किया जाता है।ठीक 27 दिन बाद यह नक्षत्र पुनः आता है।इन सभी नक्षत्रों के कुल चार चरण होते हैं,और इसी चरण के हिसाब से जातक पर इसके प्रभाव की गणना की जाती है।उदाहरण के लिए,अश्विनी के पहले चरण में पैदा होने पर पिता को कष्ट जरूर होता है,बाकी तीन चरणों में जन्म होने पर सुख- संपत्ति, राजनीति में सफलता और राजकीय पुरस्कार आदि मिलता है।